ग्वालियर-चंबल में 'मिलावट', अब तेज हुई मिलावटखोरों की धरपकड़



ग्वालियर-चंबल में ‘मिलावट’, अब तेज हुई मिलावटखोरों की धरपकड़

ग्वालियर: ग्वालियर, भिंड, मुरैना औऱ चाहे दतिया, यहां मिलावटखोरों पर हो रही ताबड़तोड़ कार्रवाईयां ये बताने के लिए काफी है कि मिलावट का धंधा जोरों से फल-फूल रहा है। ग्वालियर-चंबल अंचल में मिलावटखोरी के धंधे ने गहरे तक जड़े जमा ली हैं। दूध, घी और मावा से लेकर तेल और मिर्च मसालों में जमकर मिलावट की जा रही है। तेल मिर्च मसाले में धड़ल्ले से मिलावट होती है। लेकिन सीएम शिवराज के निर्देशों के बाद लगातार मिलावटखोरों पर शिकंजा कसा जा रहा है। कार्रवाईयां जारी हैं और नकली दूध और नकली मावे के कारोबार पर शिकंजा कसा जा रहा है।

अंचल से मिलावटखोरी को खत्म करना प्रशासन के लिए काफी टेढ़ी खीर साबित हो रहा है। ग्वालियर-चंबल की भौगोलिक बनावट इसे मुनाफाखोरों के लिए काफी मुफीद बनाती है। अंचल उत्तर प्रदेश और राजस्थान की सीमा से सटा है। वहीं दिल्ली नजदीक होने से आसानी से मिलावटी सामान सप्लाई कर दिया जाता है। इसके अलावा ग्वालियर-चंबल अंचल के जानकार पुराने इतिहास को भी इस मिलवाटखोरी के लिए संजीवनी मानते हैं। उनका कहना है कि 90 के दशक में यहां दूध, मावा और घी का उत्पादन बड़े पैमाने पर होता था। दूध, मावा और घी शुद्धता के लिए पूरे देश में मशहूर था। लेकिन समय के साथ लोगों ने पशुओं को पालना बंद कर दिया, उत्पादन कम हुआ। लेकिन डिमांड बढ़ती गई और इसी बात को ध्यान में रखते हुए सेहत के दुश्मनों ने मिलावटखोरी को फायदे का धंधा बना लिया।

मिलावटखोरी का धंधा जोरों पर है। तो प्रशासनिक तंत्र भी मिलावटखोरों की कमर तोड़ने की पुरजोर कोशिश में जुटा है। सीएम शिवराज के सख्त इरादे भी मिलावटखोरी को जड़ से खत्म करने वाले हैं। उम्मीद है कि ग्वालियर-चंबल की साख पर बट्टा लगाने वाले सेहत के दुश्मनों पर नकेल कसी जाएगी और एक बार फिर अंचल अपनी शुद्धता के लिए मशहूर होगा।

Share This

Login

Welcome! Login in to your account

Remember me Lost your password?

Lost Password