नई दिल्ली। कुत्ते को इंसानों का सबसे वफादार जानवर माना जाता है। कुछ लोग शौक की वजह से तो कुछ घर की रखवाली के लिए कुत्ते पालते हैं। सेना में ही कुत्तों को रखवाली के लिए पाला जाता है। ये कुत्ते बहुत सारे काम आसानी से कर लेते हैं। दुश्मनों और बम का पता लगाने में इनका खास योगदान होता है। लेकिन इनके बारे में कम ही लोग जानते होंगे कि इन्हें रिटायरमेंट के बाद गोली मार दी जाती है।
सेना में कुत्तों के रैंक भी दी जाती है
दरअसल, सेना में कुत्तों की सूंघने की तीव्र क्षमता और एक्टिव होने की वजह से इन्हें जासूसी के कामों में प्रयोग में लाया जाता है। इतना ही नही इन्हें सेना में रैंक भी दी जाती है। लेकिन सबसे अचरज की बात ये है कि इन्हें रिटारमेंट के बाद गोली मार दी जाती है। इस पर सेना का कहना है कि रिटायरमेंट के बाद ऐसा इसलिए किया जाता है। ताकि रिटामेंट के बाद कुत्ते किसी ऐसे व्यक्ति के पास न चले जाएं, जिससे देश के लिए खतरा पैदा हो जाए।
इस कारण से मार दी जाती है गोली
मालूम हो कि इन कुत्तों को आर्मी की सभी खुफिया जगहों के बारे में पता होता है। ऐसे में आर्मी इन्हें रिटायरमेंट के बाद ऐसे ही नहीं छोड़ती। बता दें कि ये बातें दुनिया को तब पता चली जब एक आरटीआई कार्यकर्ता ने रिटायरमेंट के बाद इन कुत्तों की मौत पर सवाल उठाया। कार्यकर्ता ने सेना से कुत्तों को गोली मारे जाने को लेकर जवाब मांगा था। जिसके जवाब में सेना ने बताया कि आखिर कुत्तों के रिटायरमेंट के बाद गोली क्यों मार दी जाती है।
यह चलन अंग्रेजों के समय से चला आ रहा है
सेना ने आगे बताया कि अगर कुत्ते का स्वास्थ्य भी ठीक नहीं होता है तो उसे एक महीने तक इलाज कराने के बाद गोली मार दिया जाता है। इसके बाद उसे पूरे सम्मान के साथ विदाई दी जाती है। हालांकि केंद्र सरकार ऐसी नीति तैयार करने की कोशिश में है, जिसके तहत रिटायरमेंट के बाद इन्हें मारा नहीं जाए। बल्कि इन्हें एडोप किया जाए। यह चलन देश के कई हिस्सों में शुरू भी हो गया है। दरअसल, सेना में रिटारमेंट के बाद कुत्तों के मारने का चलन अंग्रेजों के वक्त से चला आ रहा है।