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राजस्थान में पहले दिन 12,258 लोगों का टीकाकरण

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Bhasha
देश में रविवार तक कुल 2,24,301 लाभार्थियों को कोविड-19 का टीका लगाया गया: सरकार

जयपुर, 16 जनवरी (भाषा) देश भर के साथ राजस्थान में भी कोरोना प्रतिरक्षण टीकाकरण की शुरुआत शनिवार को हुई जहां पहले दिन 12,258 स्‍वास्‍थ्‍यकर्मियों को टीके लगाए गए। राज्‍य में कोरोना प्रतिरक्षण का पहला टीका जयपुर में एसएमएस मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. सुधीर भंडारी को लगाया गया।

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एक सरकारी प्रवक्‍ता के अनुसार पहले दिन राज्‍य के 33 जिलों के 167 टीकाकरण केंद्रों पर 16,613 स्‍वास्‍थ्‍यकर्मियों को पहले चरण का टीका लगाया जाना था। लेकिन शाम छह बजे तक 12,258 लोगों के टीकाकरण की रिपोर्ट है। सप्‍ताह में चार दिन टीकाकरण का कार्यक्रम है इसक तहत अब आगामी टीकाकरण सोमवार को होगा।

इससे पहले मुख्‍यमंत्री अशोक गहलोत ने जयपुर में राज्‍य स्‍तरीय कार्यक्रम में इसकी औपचारिक शुरुआत की और लोगों से टीकाकरण के बाद भी सावधानी बनाए रखने की अपील की। उन्‍होंने कहा कि जिस तरह हमने सभी के सहयोग से कोरोना का बेहतरीन ढंग से मुकाबला किया है उसी तरह हम इस टीकाकरण अभियान को सफल बनाकर मिसाल पेश करेंगे। उन्होंने कहा कि वैक्सीन आने के बावजूद कोरोना को पूरी तरह समाप्त करने के लिए सभी लोग मास्क लगाने, सामाजिक दूरी रखने सहित अन्य ऐहतियातों का निरन्तर पालन सुनिश्चित करें।

मुख्यमंत्री ने अल्प समय में ही प्रतिरक्षण टीका तैयार करने पर इससे जुड़े सभी वैज्ञानिकों, विशेषज्ञों और अन्य कार्मिकों को बधाई देते हुए कहा कि सभी को उन पर गर्व है। उन्होंने कहा कि कई परीक्षण और जांच के बाद आई यह दवा कोरोना पर विजय प्राप्त करने में हमारी मदद करेगी। उन्होंने अपील की है कि टीके को लेकर लोग भ्रांतियों से बचें और इस अभियान को सफल बनाने में सहयोग करें। उन्‍होंने कहा कि जनसंख्‍या को देखते हुए यह टीकाकरण बड़ा अभियान है जिसके पूरा होने में समय लगेगा।

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राजस्थान में कोरोना प्रतिरक्षण का पहला टीका जयपुर के एसएमएस मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. सुधीर भंडारी को लगाया गया। उन्‍होंने कहा कि यह पहल कर वह अपने चिकित्‍साकर्मी साथियों संदेश देना चाहते हैं कि यह टीकाकरण वैज्ञानिक उत्‍कृष्‍टता का एक नमूना है सभी तरह के जांच परीक्षण के बाद आया है। इस अवसर पर एसएमएस मेडिकल कॉलेज के एमिरेट्स प्रोफेसर डॉ. पीसी डांडिया (93 वर्ष) को भी टीका लगाया गया जो खुद इसके लिए आगे आए थे।

भाषा पृथ्वी

प्रशांत

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