ट्रेन के डिब्बों के साइड में क्यों लगी होती है यह स्टीयरिंग, क्या होता है इसका काम

ट्रेन के डिब्बों के साइड में क्यों लगी होती है यह स्टीयरिंग, क्या होता है इसका काम

Goods Train Fact : रेलगाड़ी तो हम सभी ने देखी है। आपने रेलगाड़ी में सफर भी किया होगा। वही एक रेलगाड़ी सामान ले जाने वाली भी होती है जिसे हम मालगाड़ी कहते है। यात्री ट्रेनों में कम से कम 24 डिब्बे होते है, तो वही मालगाड़ियों में कम से कम 50 से अधिक डिब्बे होते है। अगल—अलग सामान के लिए अगल अगल मालगाड़ियां होती है। आपने देखा होगा की कई मालगाड़ियों के डिब्बों की साइट में एक स्टेयरिंग जैसा कुछ लगा होता है। इसे क्यों लगाया जाता है, इसका क्या काम है? यह बहुत ही कम लोगों को पता होता है।

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लोग समझते है स्टेफनी

कई लोग इस स्टे​यरिंग को स्टेफनी समझते है। यह गोल नुमा पहिया कभी जमीन को नहीं छूटा और ना ही पटरी पर किसी दूसरी ​पहिए के पास लगा होता है, लेकिन कई लोग इसे स्टेफनी समझते है, पर ऐसा कुछ नहीं है। दरअसल, शुरुआत मालगाड़ी की बोगियों में ऐसा कोई भी चक्का नहीं लगाया जाता था। जिसके कारण रेलवे को एक बड़ी टेक्निकल प्रॉब्लम का सामना करना पड़ता था। मालगाड़ी या कोई भी ट्रेन हो उसे हमेशा समतल स्थान पर ही पार्क किया जा सकता था। तब किसी चढ़ाई या ढलान जैसी जगह पर मालगाड़ी को रोकना खतरे से खाली नहीं होता था। ऐसी जगहों पर सामान से भरे हुए मालगाड़ी के डिब्बों रोकना बहुत मुश्किल होता था।

इसलिए लगा होता है यह पहिया

रेलवे ने इस समस्या को दूर करने के लिए मालगाड़ी की हर बोगी में एक गोल नुमा चक्का लगा दिया। असल में यह गाड़ी का पहिया नहीं बल्कि एक लीवर होता है जो हैंडब्रेक की तरह काम करता है। अगर कभी मालगाड़ी को किसी चढ़ाई या ढलान पर रोकना पड़े तो इस चक्के को घुमा दिया जाता है। इससे बोगी के सारे पहिए जाम हो जाते हैं और मालगाड़ी किसी भी जगह पर आसानी से खड़ी हो जाती है।

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