Yaksha temple: मन्नत पूरी होने पर भक्त इस मंदिर में चढ़ाते हैं अनोखा प्रसाद, समय बदलने के लिए यहां दूर-दूर से आते हैं लोग

Yaksha temple: मन्नत पूरी होने पर भक्त इस मंदिर में चढ़ाते हैं अनोखा प्रसाद, समय बदलने के लिए यहां दूर-दूर से आते हैं लोग Yaksha temple: Devotees offer unique prasad to this temple after the fulfillment of the vow, people come here from far and wide to change the time nkp

Yaksha temple: मन्नत पूरी होने पर भक्त इस मंदिर में चढ़ाते हैं अनोखा प्रसाद, समय बदलने के लिए यहां दूर-दूर से आते हैं लोग

Yaksha temple in mandsaur: आस्था के आगे न तो कई विज्ञान काम करते हैं और न ही कोई तर्क। भारत में कई ऐसे मंदिर हैं जो अनोखे माने जाते हैं। मन्नत पूरी होने पर भक्त इन मंदिरों में स्थिति के अनुसार प्रसाद चढ़ाते हैं। कहीं सोना-चांदी चढ़ाने की प्रथा है, तो कहीं शराब और न जाने क्या-क्या चढ़ाए जाते हैं। इसी कड़ी में आज हम आपको एक ऐसे मंदिर के बारे में बताएंगे जहां लोग मन्नत पूरी होने पर घड़ियां चढ़ाते हैं। सुनने में थोड़ा अजीब लगता है। लेकिन ये बिल्कुल सच है।

यह मंदिर कहां स्थित है

बता दें कि ये अनोखा मंदिर मध्य प्रदेश के मंदसौर में स्थित है। यहां परंपरा के अनुसार लोग घड़ियां चढ़ाते हैं। माना जाता है कि जब आपके जीवन में समय खराब चल रहा हो तो यहां घड़ी चढ़ाना चाहिए। घड़ी चढ़ाने से सब अच्छा हो जाता है। परंपरा के अनुसार अब तक हजारों लोग यहां घड़ी चढ़ा चुके हैं। इस मंदिर की खास बात यह है कि यहां न तो भगवान की मूर्ति है, न ही पुजारी फिर भी यहां सैंकड़ों लोगों की आस्था है।

यहां यक्ष साकार रूप में दिखाई देते हैं

मंदिर, मंदसौर के चिरमोलिया में सड़क किनारे एक वट वृक्ष के नीचे बना हुआ है। गांव वाले इस मंदिर को सगस बावजी का मंदिर कहते हैं। सगस बावजी को शास्त्रों में यक्ष भी कहा गया है। माना जाता है कि यहां यक्ष साकार रूप में दिखाई देते हैं। कई लोगों ने उनके साक्षात दर्शन किए हैं। स्थानीय लोग ये भी कहते हैं कि यक्ष, रास्ता भटके कई लोगों को साथ ले जाकर रास्ता भी दिखाते हैं और उन्हें घर तक छोड़ कर आते हैं। हालांकि इस बात में सच्चाई कितनी है हम इसकी पुष्टी नहीं करते हैं।

हजारों लोग अपनी आस्था के अनुसार यहां आकर मन्नत मांगते हैं और घड़ी चढ़ाते हैं। मंदिर का पूरा इलाका घड़ियों से पटा पड़ा है। बता दें कि हर साल हजारों घड़ियों को नदी में बहाया भी जाता है। लेकिन फिर से लोग अपनी आस्था के अनुसार यहां घड़ी चढ़ाकर चले जाते हैं। माना जाता है कि मंदिर सैकड़ों साल पुराना है। पहले यहां केवल एक चबूतरा हुआ करता था, जिस पर सगस बावजी बैठा करते थे, लेकिन धीरे-धीरे यहां पर लोगों ने एक मंदिर का निर्माण कराया और आज पूरा मंदिर परिसर घड़ियों से पटा पड़ा है।

इन घड़ियों को कोई नहीं चुराता

मंदिर में ताला भी नहीं लगाया जाता और इन घड़ियों को कोई चुराता भी नहीं। स्थानीय लोग बताते हैं कि एक बार किसी व्यक्ति ने 5 घड़ियां चुराईं तो वह अंधा हो गया। हालांकि, बाद में प्रायश्चित करने के लिए उसने मंदिर में पांच की जगह 10 घड़ियां चढ़ाईं तब जाकर उसे दिखाई देने लगा। लोग मानते हैं कि यहां आने से सिर्फ समय ही नहीं ठीक होता, बल्कि यहां आने वाले लोगों की कई प्रकार की मन्नतें भी पूरी होती हैं।

किसी भी समस्या का तुरंत समाधान

निसंतान महिलाओं को यहां आने से संतान सुख की प्राप्ती होती है। खोई चीज भी यहां मन्नत मांगने से मिल जाती है। यहां मन्नत मांगने से कई प्रकार की परेशानियों से भी छुटकारा मिल जाता है। बताया जाता है कि यक्ष किसी भी समस्या का समाधान तुरंत करते हैं। इसीलिए लोग अपनी समस्या के त्वरित समाधान और बिगड़े समय को अच्छे में बदलने के लिए यहां पर मन्नत मांगने आते हैं।
इस मंदिर में भी लोग चढ़ाते हैं घड़ी

ऐसा ही एक और मंदिर है

मंदसौर की तरह ही उत्तर प्रदेश के जौनपुर में भी एक ऐसा ही मंदिर स्थित है जिसे ग्राम देवता का मंदिर कहा जाता है। स्थानीय लोग इस मंदिर को ब्रह्म बाबा के नाम से भी जानते हैं। यहां भी मन्नत पूरी होने पर घड़ियां चढ़ाई जाती हैं। यहां के लोग बताते हैं कि एक बार एक व्यक्ति के मन में ट्रक ड्राइवर बनने की चाहत हुई ड्राइविंग सीखने के लिए वह ब्रह्म बाबा से मन्नत मानने आया। संयोगवश वह ट्रक ड्राइवर बन गाय और उसके अच्छे दिन आ गए। ऐसे में वो भगवान को भेंट स्वरूप घड़ी चढ़ा गया। जैसे ही लोगों को इस बात की जानकारी हुई कि घड़ी चढ़ाने से बाबा मनोकाना पूरी करते हैं तो धीरे-धीरे यहां घड़ी चढ़ाने की परंपरा शुरू हो गई।

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