Golgappa : गोलगप्पे का आविष्कार कब हुआ, कितने हो गए महंगे?

Worlds First Pani Puri: दुनिया की पहली पानी पूरी कब और कहां बनी, महाभारत काल की द्रोपदी से जुड़ा है प्रसंग

Share This

Worlds First Pani Puri: हर किसी की पसंद कहलाने वाले गोलगप्पे या पानी पूरी के बारे में शायद बहुत कम ही लोग जानते हैं कि इसका आविष्कार कब हुआ था। क्या आप जानते हैं कि दुनिया की पहली पानी पूरी कब और कहां बनी और क्या महाभारत काल की द्रोपदी से इसका प्रसंग जुड़ा है।

दरअसल, गोलगप्पे के आविष्कार के संबंध में ऐसी मान्यता है कि इसका आविष्कार महाभारत काल के दौरान द्रोपदी ने किया था। golgappas कहा जाता है कि जब द्रोपदी पांडवों के साथ पहली बार अपने ससुराल पहुंची तो पांडवों की मां कुंती ने उनकी परीक्षा लेने का मन बनाया। Pani puri वह देखना चाहती थीं कि द्रोपदी पांचों पांडवों का पेट किस तरह भर सकती हैं।

Puchka तब माता कुंती ने द्रोपदी से कुछ ऐसा भोजन बनाने के लिए कहा, जिससे पांडवों का पेट भर जाए। Fulki उस समय द्रोपदी ने अपनी कला का परिचय देते हुए जलापत्र (पानी पूरी) बनाकर पांडवों को खिलाए, जिससे पांडवों का पेट भर गया।

water Batashe द्रोपदी के बनाए हुए इस भोजन से पांडवों को अति प्रसन्नता हुई। Batashe पांडवों को इस तरह प्रसन्न देखकर माता कुंती ने खुश हुईं और उन्होंने द्रोपदी को अमर होने का वरदान दे दिया।

कितने महंगे हो गए गोलगप्पे

यदि गोलगप्पे की महंगाई की बात करें तो एक जमाने में 1 रुपए में 10 गोलगप्पे भी मल जाया करते थे, लेकिन आज के समय में 10 रुपए में औसतन 6 गोलगप्पे मिल रहे हैं। Padaka इसके साथ ही होटलों और भारतीय बाजरों में इनके नाम की ही तरह कीमत भी अलग-अलग है।

नए-नए तरीकों से गोलगप्पे बनाए और बेचने के चलत ने चलते भी इनकी प्राइस में अंतर रहता है। वैसे तो गोलगप्पे भारत में किसी भी जगह आसानी से मिल जाया करते हैं, लेकिन कुछ खास तरह से बनाने के बाद इसे काफी ऊंचे दामों पर भी बेचा जाता है।

गोलगप्पे कैसे बनते हैं

वहीं गोलगप्पे को बनाने की विधि की बात की जाए तो इसके पानी के लिए स्वाद अनुसार मसालों को उपयोग करते हुए तैयार किया जा सकता है। साथ ही इसकी पूरी के लिए गेहूं का आटा साथ में सूजी या रवा को मिलाकर बनाया जा सकता है। अपने खाने के अनुसार इनकी साईज रखी जा सकती है।

भारत में गोलगप्पे या पानी पूरी के नाम
– गोलगप्पे
– पानीपुरी
– पुचका
– गुपचुप
– पानी के पताशे
– पड़ाका
– पकोड़ी
– फुल्की
– बताशे
– जलापत्र

Login

Welcome! Login in to your account

Remember me Lost your password?

Lost Password