कई बुद्धिजीवी सिकल सेल को समझते हैं साधारण एनीमिया - सारिका

World Sickle Cell Day 2022: कई बुद्धिजीवी सिकल सेल को समझते हैं साधारण एनीमिया – सारिका

World Sickle Cell Day 2022:  विश्व सिकलसेल दिवस के अवसर पर आमलोगों में इस रोग के बारे में जागरूकता बढ़ाने नेशनल अवार्ड प्राप्त विज्ञान प्रसारक सारिका घारू जनजातिबहुल ग्रामों में पहुंचकर इस रोग के फैलाव को रोकने के बारे में बता रही हैं। सारिका ने बताया कि एक सरकारी रिपोर्ट के अनुसार भारत में सबसे अधिक सिकल सेल से प्रभावित आबादी मध्यप्रदेश में है। 2007 में आईसीएमआर के अध्ययन के अनुसार यहां की एक करोड़ पचास लाख की जनजाति आबादी में से लगभग 10 से 33 प्रतिषत तक इस रोग की वाहक तथा लगभग 0.7 प्रतिशत रोगग्रस्त है।

सारिका ने संदेश दिया कि इस रोग के बच्चों को स्कूल में बस्ते का बोझ कम करने , उन्हें पानी पीने, टॉयलेट जाने , अधिक मेहनत का काम न करने के लिये शिक्षकों एवं पालकों को प्रशिक्षित करने की अवश्यकता है। रोगी के प्रति सहानुभूति पूर्वक व्यवहार तथा काम का स्थान न अधिक गर्म न अधिक ठंडा हो यह ध्यान रखना चाहिये। यह सामान्य एनिमिया नहीं है जिसे आयरन देकर ठीक किया जा सके, यह जीवन भर चलने वाला जन्मजात रोग है। अतः इसका फैलाव रोकने के लिये विवाह के पूर्व सिकलसेल कुंडली मिलाना जरूरी है। सारिका ने आव्हान किया कि आज के दिन कुछ पल तो निकालिये इस रोग की पीड़ा को समझने के लिये।

क्यों मनाया जाता है विश्व सिकलसेल दिवस

सारिका ने बताया कि संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 22 दिसम्बर 2008 को एक प्रस्ताव को अपनाया जिसमें सिकलसेल रोग को दुनिया की सबसे प्रमुख अनुवांशिक बीमारी में से एक के रूप में मान्यता दी। इसके बाद 19 जून 2009 से हर साल यह दिन विश्व सिकलसेल दिवस के रूप में मनाया जाता है।

Share This

0 Comments

Leave a Comment

Login

Welcome! Login in to your account

Remember me Lost your password?

Lost Password