वर्ल्ड डायबिटिक डे: सावधान! कहीं ये डायबिटीज आपकी आंखों की रोशनी न छीन ले, जानें क्या है डायबिटिक रेटिनोपैथी बीमारी

World Diabetes Day 2024: विश्व में डायबिटीज के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, जिसके पीछे कई कारण हैं जैसे कि बदलती दिनचर्या, बढ़ता तनाव, आनुवंशिक और खानपान में बदलाव।

वर्ल्ड डायबिटिक डे: सावधान! कहीं ये डायबिटीज आपकी आंखों की रोशनी न छीन ले, जानें क्या है डायबिटिक रेटिनोपैथी बीमारी

World Diabetes Day 2024: विश्व में डायबिटीज के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, जिसके पीछे कई कारण हैं जैसे कि बदलती दिनचर्या, बढ़ता तनाव, आनुवंशिक और खानपान में बदलाव। भारत में भी डायबिटीज के मरीजों की संख्या लगभग 77 लाख है, जो अगले 20 वर्षों में 1.35 मिलियन से अधिक होने की संभावना है। इसी कारण दुर्भाग्य से भारत को विश्व की 'डायबिटीज कैपिटल' के रूप में पहचाने जाने लगा है।  डायबिटीज का असर शरीर के दूसरे अंगों के साथ आंखों पर भी होता है।

आंखों के लिए डायबिटिक रेटिनौपैथी

डायबिटीज का असर आंखों पर भी पड़ता है, जिसे डायबिटिक रेटिनोपैथी कहते हैं। इसमें रेटिना पर नुकसान होता है, जिससे आंखों की रौशनी प्रभावित हो सकती है। इसके प्रारंभिक अवस्था में कोई लक्षण नहीं दिखाई देते हैं। लेकिन धीरे धीरे ये एडवांस स्टेज में पहुंचकर लक्षण दिखाना शुरू कर देती है।

एमपी में 15 दिन का जागरुकता अभियान

मध्य प्रदेश स्टेट ऑफ़ल्थैमिक सोसाइटी द्वारा 14 नवंबर को वर्ल्ड डायबिटिक (World Diabetes  Day 2024) डे पर एक विशेष जन जागरूकता अभियान शुरू किया जा रहा है। जिसका उद्देश्य डायबिटीज से होने वाली ब्लाइंडनेस के बारे में लोगों को जागरुक करना है। इस 15 दिवसीय आयोजन में प्रदेश भर में विभिन्न गतिविधियाँ डायबिटीज को लेकर जागरुक करने के लिए की जाएंगी। इस दौरान  डायबिटीज के मरीजों के रेटिना की जाँच, सेमिनार और कार्यशाला,  इन आयोजनों में डायबिटिक रेटिनोपैथी के बारे में जानकारी दी जाएगी और इसके निदान व उपचार के तरीकों पर चर्चा की जाएगी।

क्या है डायबिटिक रेटिनोपैथी?

डायबिटिक रेटिनोपैथी डायबिजीज (Diabetic Retinopathy) से की तरह ही आंखों की एक ऐसी स्थिति है जो आंख के पीछे के सेंसिटिव लाइट टिशु यानी रेटिना को प्रभावित करती है। यह तब होता है जब शरीर में ब्लड शुगर का लेवल बढ़ जाता है।

साल में एक बार आंखों की जांच जरूरी

म प्र ऑफ़ल्थैमिक सोसायटी के डॉ. गजेंद्र चावला ने बताया कि डायबिटीज के सभी मरीजों को साल में कम से कम एक बार अपनी आंखों की जांच करवानी चाहिए। जिसमें रेटिना या पर्दे की जांच शामिल होना जरूरी है। चाहे आपको नज़र से संबंधित कोई लक्षण हो या न हो। इसके अलावा अपनी जीवन सैली में भी बदलाव करें हेल्थी फूड खाएं।

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इस तरह दिखता है डायबिटिक रेटिनौपैथी का असर

शुरूआत में कोई लक्षण नहीं

एडवांस स्टेज में ही मरीज़ को लक्षण दिखते हैं

रेटिना पर नुकसान होता है, जिससे आंखों की रौशनी कम हो सकती है

समय पर इलाज नहीं लेने पर पूरी तरह आंखों की रौशनी खत्म हो सकती है

डायबिटिक रेटिनोपैथी के लक्षण

- धुंधला दिखना
- रात में देखने में परेशानी
- रंगों को पहचानने में परेशानी
- आंखों में दर्द या दबाव महसूस होना

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