जिस वर्ग को मिल रहा Reservation वही कर रहे विरोध, कहा- नहीं लेना चाहते आरक्षण कोटे से नौकरी -

जिस वर्ग को मिल रहा Reservation वही कर रहे विरोध, कहा- नहीं लेना चाहते आरक्षण कोटे से नौकरी

भोपाल: आरक्षण को लेकर देश में कई बार बहस होती रही है। लेकिन इस बार आरक्षण को लेकर एक ऐसे वर्ग ने आरक्षण को खत्म करने की मांग की है जिन्हें खुद आरक्षण मिल रहा है। जी हां, प्रदेश की करीब 200 महिलाओं ने आरक्षण को खत्म करने के लिए राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को पत्र लिखकर गुहार लगाई है। जिसके बाद राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने मध्य प्रदेश के मुख्य सचीव इकबाल सिंह बैस को मामले की जांच कर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

आरक्षण से फायदे की जगह नुकसान ज्यादा

महिलाओं का कहना है कि एमपी पीएससी की परीक्षा में आरक्षण से महिलाओं को फायदे की जगह नुकसान हो रहा है। प्रदेश की करीब 200 से ज्यादा छात्राओं ने ई-मेल के जरिये राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से राज्य लोक सेवा आयोग (MPPSC) की परीक्षा में महिला आरक्षण खत्म करने की गुहार लगाई है।

महिला अभ्यर्थियों ने लगाए ये आरोप

ये सभी महिलाएं पीएससी की परीक्षाओं में अभ्यर्थी रह चुकी हैं। इनका आरोप है कि 30 प्रतिशत महिला आरक्षण की विसंगति की वजह से महिलाओं को लाभ मिलने के बजाय उनके चयनित होने के अवसर सीमित हो गए हैं। इस मामले का नेतृत्व कर रहीं रतलाम की सुनीता जैन राज्यसेवा परीक्षा में साक्षात्कार के दौर से बाहर हो गई थीं। उन्हें मुख्य परीक्षा में 1249 अंक मिले थे, जबकि पुरुष अभ्यर्थी आशीष मिश्र को 1240 अंक आने के बाद भी साक्षात्कार के लिए चयनित किया गया था। पीएससी ने इसका कारण महिला आरक्षण के लिए अपनाए गए क्षैतिज फॉर्मूला को बताया था।

राज्यमंत्री इंदर सिंह परमार ने क्या कहा

सामान्य प्रशासन विभाग के राज्यमंत्री इंदर सिंह परमार ने बताया कि एमपीपीएससी में महिला आरक्षण के फॉर्मूले पर विसंगतियों को लेकर कुछ महिलाएं मिली थीं। आरक्षण के कई मामले न्यायालय में लंबित हैं। कभी एक पक्ष तो कभी दूसरा पक्ष असंतुष्ट होता है। फिर भी परीक्षण करवा रहे हैं।

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