Women Empowerment: मप्र का अनोखा स्कूल, यहां पढ़ाई से पहले बेटियों की होती है पूजा

Women Empowerment: मप्र का अनोखा स्कूल, यहां पढ़ाई से पहले बेटियों की होती है पूजाWomen Empowerment:Unique school of MP, where daughters are worshiped before studying

Women Empowerment: मप्र का अनोखा स्कूल, यहां पढ़ाई से पहले बेटियों की होती है पूजा

भोपाल। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने एक नारा दिया था 'बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ' । लेकिन आज भी दूर सुदूर इलाकों में बेटियां पढ़ाई से बंचित हैं। समाज आज भी उन्हें उस नजर से नहीं देखता, जिस नजर से एक लड़के को देखा जाता है। हालांकि ऐसा भी नहीं है कि सारे लोग इसी मानसिकता के हैं। कुछ ऐसे भी लोग हैं जो बेटों से ज्यादा बेटियों को तब्बजों देते हैं। इन्हीं लोगो में से एक हैं मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के कटनी जिले में शिक्षक भैया लाल सोनी। उन्हें बालिका सम्मान के लिए जाना जाता है। सोनी बीते 23 सालों से पढ़ाई कराने से पहले छात्राओं की पूजा करते हैं।

शिक्षक गंगा जल से धोते हैं बच्चों के पैर
कटनी (Katni) जिले के लोहरवारा में एक प्राथमिक स्कूल है। जहां प्रभारी के रूप में भैया लाल सोनी छात्राओं को पढ़ाते हैं। बच्चियां जैसे ही स्कूल पहुंचती है, उनके पैरो को सोनी पहले गंगा जल से धोते हैं। इसके बाद उनकी पूजा की जाती है और तब जाकर उन्हें क्लासरूम में भेजा जाता है। लॉकडाउन (Lockdown) लगने के बाद भी उन्होंने मोहल्ला क्लास में कन्या पूजन को जारी रखा।

23 सालों से कर रहे हैं इस काम को
भैया लाल सोनी कहते हैं कि हमने ये अभियान एक पवत्र सोच के साथ शुरू की थी। उन्होंने इस अभियान का नाम नमामी जननी दिया है। जिसका उद्देश्य है, बच्चियों और महिलाओं का सम्मान करना। वो लगातार 23 वर्षों से इस काम को करते आ रहे हैं। उन्होंने आगे कहा कि हम इस अभियान में सिर्फ महिलाओं का सम्मान ही नहीं करते बल्कि स्वच्छता के संदेश के साथ-साथ छुआछूत को दूर करने का भी प्रयास करते हैं। मैं इस काम को जीवन भर करते रहुंगा।

शिवराज सरकार भी सुशासन दिवस पर कन्या पूजन करेगी
मालूम हो कि मध्य प्रदेश की वर्तमान शिवराज सिंह चौहान सरकार ने भी इस साल 25 जनवरी को सुशासन दिवस के मौके पर यह तय किया है कि सभी सरकारी कार्यक्रम कन्या पूजन के बाद ही शुरू किया जाएगा। ऐेसे में सोनी सरकार के इस निर्णय की सराहना करते हुए कहा कि बेटियों से हमेशा भेदभाव किया जाता है। इस तरह के आयोजन महिलाओं के सम्मान में एक अच्छी पहल है।

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