Hiroshima Day: हिरोशिमा और नागासाकी में हुए परमाणु हमले में जिंदा बची महिला ने बताई आप बीती, सुनकर कांप जाएगी आपकी रूंह

Hiroshima Day 2024: आज से 79 साल पहले 6 और 9 अगस्त को जापान के हिरोशिमा और नागासाकी शहरों पर अमेरिका ने परमाणु बमों से हमला कर दिया था।

Hiroshima Day: हिरोशिमा और नागासाकी में हुए परमाणु हमले में जिंदा बची महिला ने बताई आप बीती, सुनकर कांप जाएगी आपकी रूंह

Hiroshima Day 2024: आज से 79 साल पहले 6 और 9 अगस्त को जापान के हिरोशिमा और नागासाकी शहरों पर अमेरिका ने परमाणु बमों से हमला कर दिया था।

ऐसा माना जाता है कि इस हमले में हिरोशिमा की 3 लाख 50 हजार की आबादी में से करीब 1 लाख 40 हजार लोग मारे गए थे और नागासाकी में करीब 74 हजार लोग मारे गए थे।

इस बमबारी ने एशिया में दूसरे विश्व युद्ध को अचानक खत्म कर दिया था। जापान ने 14 अगस्त 1945 को आत्मसमर्पण कर दिया था, लेकिन आलोचकों का कहना है कि जापान पहले ही सरेंडर करने की कगार पर था। उस पर इतना बड़ा हमला करने की कोई आवश्‍यकता ही नहीं थी।

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बचे लोगों को कहा जाता हिबाकुशा

अमेरिका ने जापान के ऊपर की इस भीषण बमबारी में जीवित बचे लोगों को हिबाकुशा कहा जाता है। इससे जीवित बचे लोगों को परमाणु बम के हमले के कई सालों बाद तक शहरों में रेडिएशन और मनोवैज्ञानिक मुश्किलों से गुजरना पड़ा था।

कई रिपोर्ट्स में बताया जाता है कि जापान के लोगों पर हुए इस परमाणु हमले का असर दशकों बाद तक देखने को मिला था। परमाणु हमले से फैलने वाला रेडिएशन काफी नुकसान पहुचाने वाला होता है।

तेरुको उएनो की कहानी

इस परमाणु हमले के समय तेरुको उएनो सिर्फ 15 साल की थीं जब वह 6 अगस्त 1945 को हिरोशिमा में हुए परमाणु बम हमले में जीवित बच गईं।

इस भारी बमबारी के वक्त पर तेरुको हिरोशिमा रेड क्रॉस हॉस्पिटल में नर्सिंग स्कूल में दूसरे साल में थीं। एक बम के टकराने के बाद अस्पताल की डॉरमेटरी में आग लग गई थी।

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तेरुको ने लपटों को बुझाने की कोशिश की, लेकिन उनके कई साथी छात्र इसमें जलकर मर चुके थे। हमले के बाद के हफ्ते की उनकी याद्दाश्त केवल इतनी है कि उन्होंने दिन-रात लगकर बुरी तरह से जख्मी हुए लोगों का इलाज किया जबकि उनके पास खाने-पीने के सामान न के बराबर बचा हुआ था।

ग्रेजुएशन के बाद तेरुको हॉस्पिटल में काम करती रहीं, जहां उन्होंने स्किन ग्राफ्ट के ऑपरेशंस में भरपूर मदद की। मरीज की जांघ से खाल लेकर इसे जलने की वजह से विकसित होने वाले केलोइड जख्म वाली जगह पर ग्राफ्ट किया जाता था।

कुछ समय बाद तेरुको की शादी तत्सुयुकी से हुई जो खुद भी परमाणु बम हमले में जीवित बच गए थे। जब तेरुको गर्भवती हुईं तो उन्हें चिंता हुई कि क्या उनका बच्चा स्वस्थ होगा और क्या वह जीवित बच पाएगा या नहीं। इस चिंता में उन्‍हें दिन रात नींद नहीं आती थी। उनकी बेटी तोमोको पैदा हुईं और उसका स्वास्थ्य अच्छा था।

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तेरुको उएनो कहती हैं कि "मुझे नर्क के बारे में नहीं पता, लेकिन जिस सब से हम गुजरे शायद वही नर्क होगा। ऐसा फिर कभी नहीं होना चाहिए।" वे कहती हैं कि परमाणु हथियारों को खत्म करने की दिशा में पहला कदम स्थानीय सरकारी नेताओं को उठाना चाहिए।

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