Veganuary Month: जनवरी को क्यों कहते हैं ‘वेजनरी मंथ’   

Veganuary Month: जनवरी को क्यों कहते हैं ‘वेजनरी मंथ’, जानिए ‘वीगन’ और ‘वेजीटेरियन’ में अंतर

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   हाइलाइट

  • जनवरी को क्यों कहते हैं ‘वेजनरी मंथ’।
  • ‘वीगन’ और ‘वेजीटेरियन’ में क्या है अंतर।
  • शाकाहारी महीना पर विचार।

 

 

Veganuary Month: विश्व भर में जनवरी में मनाया जाने वाला त्योहार जो कि ‘वेजनरी मंथ’ के नाम से जाना जाता है। एक ऐसा मंथ, जो गैर-शाकाहारी लोगों को अपने जीवन में शाकाहार अपनाने के लिए प्रोत्साहित करता है।

यह उत्सव पूरे एक महीने मनाया जाता है। जो हमें उन बेकसूर पशुओं का शोषण और उनकी हत्या करने से बचाता है, जिनका कोई कसूर नहीं होता और हम उनकी बेरहमी से हत्या कर देते हैं। इन सभी पर फोकस करता है वेजनरी महीना। क्या है इसका महत्व आइए आपको बताते हैं…

अक्सर जीवन में शाकाहारी लोगों का उद्देश्य जानवरों के दुख, पीड़ा को समझने और उसको कम करना होता है। शाकाहारी लोग मांस, अंडे और किसी भी पशु का उत्पाद न खाकर इनसे परहेज करते हैं। ऐसा करने से वैश्विक स्वाथ्य में सुधार होता है।

साथ ही शहद का उत्पादन, चमड़े के सामान और जानवरों से होने वाली खेती में पशु का शोषण मानते हैं। इन सभी का त्याग कर शाकाहारी लोग अपने जीवन में पशुओं के शोषण को बचाते हैं।

अगर आपको शाकाहारी होना हैं तो आपको ऐसी वे सभी चीजों का त्याग करना होगा, जो पशुओं से उत्पादित होती हैं। साथ ही वेगन्युअरी मंथ लोगों के आहार को बदलने पर फोकस करता है। इससे आप धीरे-धीरे अपने जीवन में बदलाव देख पाएंगे।

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   शाकाहारी माह का इतिहास

वेगनरी मंथ (Veganuary Month) को जनवरी के महिने में मनाया जाता है। जिसे जनवरी साल 2014 में उत्तराखंड में वेगन संस्थापक जेन और मैथ्यू ने लॉन्च किया गया था। इसे लॉन्च करने का मुख्य उद्देश्य था कि वह सारी दुनिया को शाकाहारी देखना चाहते थे।

इसके शुरुआत से लोगों में जागरुकता पैदा हुआ और लोगों ने अपना नजरिया बदला। इतना ही नहीं इस माह को एक उत्सव की तरह मनाया जाता है। इसके साथ ही कई कार्यक्रमों का आयोजन भी किया जाता है। साल का पहला महिना होता है, और नए साल की शुरुआत अच्छी सोच के साथ हो इस नजरिये  से लोग इस मंथ में अपनी अच्छी भूमिका निभाते हैं।

   ‘वीगन और ‘वेजीटेरियन’ में अंतर

वीगन लोग मांस, अंडे के साथ-साथ वे सब चीजों का इस्तेमाल नहीं करते जो पशुओं से उत्पादित होती हैं, या जिनमें पशुओं का शोषण हुआ हो। ऐसी चीज़ों को न तो खाते हैं और न ही इनका इस्तेमाल करते हैं। इनका जनवरी मंथ में खास त्यौहार होता है, जिसे ‘वेजनरी मंथ’ कहते हैं।

वहीं ‘वेजीटेरियन’ मांस, अंडे को छोड़कर वे सब चीजों को खाते हैं, जिनमें पशुओं का इस्तेमाल किया हो। सिर्फ पशुओं का मांस नहीं खाते।

   क्या खाते हैं?

लोगों की सबसे बड़ी ग़लतफ़हमी है, कि शाकाहार होने पर सिर्फ सलाद या हरी-भरी चीजों को ही खाया जाता है। ऐसा बिल्कुल नहीं है। शाकाहारी लोग लोग सिर्फ और सिर्फ वो चीजें खाते हैं, जिनके बनने में पशु का इस्तेमाल नहीं किया गया हो।

अगर खेत में हल चलाकर भी कुछ उत्पादन किया है तो इसे भी नहीं खाएगे। इनकी जगह वो पशुओं के बगैर इस्तेमाल चोज़ो को खाते हैं, जिनमें पिज्जा, पनीर, आइस्क्रीम, मैक, बर्गर, जैसी चीजें शामिल होती हैं। इनके लिए मार्केट में भी शाकाहारी मेनू पेश किया जाता है।

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   इन उत्पादों से परहेज

शाकाहारी (Veganuary Month)लोग पशु-भोजन से बचने के अलावा ऐसे उत्पादों को खरीदने या उनके इस्तेमाल से बचते हैं, जिनमें पशु से बना सामान और जानवरों से मिलने वाली चीजें शामिल होती हैं। साथ ही ऐसी चीज़ों को भी अमल में नहीं लाते जो पशुओं से बनी हैं।

   शाकाहारी महीना पर विचार

कई कारणों के चलते लोग शाकाहारी माह (Veganuary Month) के लिए शाकाहारी बनने के भरचक प्रयास करते हैं, लेकिन इनमें से 3 सबसे महत्वपूर्ण कारण हैं।

पहला कारण जो कि  उन पशुओं के लिए लोगों को शाकाहारी बनाता है, जो पशुओं के प्रति दयालुता दर्शाता है। लोग पशुओं से ज्यादा प्यार करते हैं। उनके शोषण करने से बचते हैं। साथ ही पशुओं की जगह वनस्पतियों का इस्तेमाल पर फोकस करते हैं।

दूसरा कारण पशुओं के कल्याण के लिए और अपने अच्छे जीवन जीने के लिए सबसे ज्यादा नैतिक तरीका अगर कोई है, तो पशुओं को किसी भी प्रकार की हानि नहीं पहुंचाना। इसके साथ ही पशुओं को उनके अधिकारों को पूरा महत्व देना होता है।

तीसरा कारण पर्यावरण की चीजें हमारे जीवन में अहम रोल निभाती है। जिनमें हम सने हुए हैं। सबसे ज्यादा इस्तेमाल अगर हम इनका ही करेंगे तो हमारे लिए फायदेमंद रहेगा। इसके साथ ही आने वाली पीड़ी को एक अच्छा संदेश देना भी है। इसके अलावा शाकाहारी बनने की लिस्ट बहुत बड़ी है।

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