Dhanteras 2023: धनतेरस पर क्यों छिपाकर जलाया जाता है यम के नाम ​दीया, ये है सही तरीका

धनतेरस (Dhanteras 2023) से दीवाली के त्योहार का शुभारंभ होता है। हर साल कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को धनतेरस मनाते हैं।

Dhanteras 2023: धनतेरस पर क्यों छिपाकर जलाया जाता है यम के नाम ​दीया, ये है सही तरीका

Dhanteras 2023: धनतेरस (Dhanteras 2023) से दीवाली के त्योहार का शुभारंभ होता है। हर साल कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को धनतेरस मनाते हैं। इसे धन त्रयोदशी भी कहते हैं। धनतेरस के दिन लोग बाजार से खरीदारी भी करते हैं, जिसमें सोने और चांदी के आभूषण, झाड़ू, नमक, धनिया, देवी-देवताओं की मूर्ति खरीदने का विशेष महत्व होता है।

अगर इस दिन आप कुछ भी खरीदारी करते हैं तो माता लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं। दीवाली (Diwali 2023) के समय लोग अपने घर और दुकान को बिजली की मालाओं और दीयों से सजाए रखते हैं। दीपावली से ठीक दो दिन पहले धनतेरस मनाया जाता है और इस बार का धनतेरस 10 नवंबर को है। अगर आप धनतेरस में सुख संपत्ति की कामना करते हैं तो हम आपको बताते हैं कि धनतेरस के दिन घर में कितने दीये जलाने चाहिए।

यम दीपक जलाने के पीछे एक पौराणिक कथा क्या है?

धनतेरस के दिन यम दीपक जलाने के पीछे एक पौराणिक कथा है। इसके अनुसार, किसी राज्य में हेम नामक राजा था। ईश्वर की कृपा से उन्हें एक पुत्र प्राप्त हुआ। जब विशेषज्ञों ने उनके बेटे की कुंडली दिखाई, तो उन्हें पता चला कि शादी के चार महीने बाद राजकुमार की मृत्यु हो जाएगी। ऐसे में राजा ने उसे ऐसी जगह भेज दिया, जहां किसी लड़की की परछाई भी उस पर न पड़े। लेकिन वहां उन्होंने एक राजकुमारी से विवाह कर लिया। रीति के अनुसार विवाह के चौथे दिन यमराज के दूत राजकुमार के पास आए।

यह देखकर राजकुमारी बहुत रोई। दूतों ने ये सारी बातें यमराज को बताई और यम के दूतों में से एक ने कहा, “हे यमराज, ऐसा कोई उपाय नहीं है, जिससे किसी व्यक्ति को अकाल मृत्यु से बचाया जा सके।” तब उन्होंने यमराज से कहा कि जो कोई कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि के दिन शाम के समय मेरी ओर से दक्षिण दिशा में दीपक जलाएगा, तो वह अकाल मृत्यु से बच जाएगा। इसी कारण से हर साल धनतेरस पर यम का दीपक जलाने की परंपरा है।

धनतेरस पर जलाते हैं यम का दीया

धनतेरस की देर रात को एक दीया और जलाना चाहिए, जिससे अकाल मृत्यु को भी टाला जा सकता है। इस दिन पुराने दीए जलाना ही शुभ माना जाता है। घर के किसी भी बुजुर्ग द्वारा इसे जलाकर घर के बाहर रखा जाता है। इसे यम का दीया कहा जाता है। इसमें चार बत्ती होनी चाहिए और सरसों के तेल से इसे जलाकर आप घर के बाहर रख सकते हैं। मान्यता है कि इससे अकाल मृत्यु भी टल जाती है।

ऐसे जलाएं यम दीपक

धनतेरस के दिन पुरीनी  मिट्टी के दीपक में चारों ओर बाती लगा लें औऱ सरसों का तेल भर दें। इसके बाद घर की दक्षिण दिशा की तरफ मुख करके इस दीपक को जला दें। इसके साथ ही इस मंत्र का जाप कर लें।

क्यों छिपाकर जलाया जाता है यम के नाम ​दीया

छिपाकर ​दीये जलाने से घर-परिवार पर बुरी नजर नही लगती है। जब किसी व्यक्ति को बुरी नजर लगती है तो उसके जीवन में कई तरह के नकारात्मक परिवर्तन होने लगते हैं। घर में हमेशा क्लेश की स्थिति बनी रहती है, जिसके कारण अशांति का माहौल बना रहता है। जिस व्यक्ति को नजर लगती है उसका स्वास्थ्य भी अचानक बिगड़ने लगता है। साथ ही आर्थिक स्थिति में भी गिरावट होने लगती है। व्यक्ति के बने बनाए काम बिगड़ने लगते हैं।

दीया जलाते समयये मंत्र का उच्चारण करे

मृत्युनां दण्डपाशाभ्यां कालेन श्यामया सह। त्रयोदश्यां दीपदानात् सूर्यजः प्रीयतां मम्।

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