दोपहर के 1:30 या 2:30 को हम डेढ़ या ढ़ाई क्यों कहते है, साढ़े एक या साढ़े दो क्यों नहीं कहते ?

दोपहर के 1:30 या 2:30 को हम डेढ़ या ढ़ाई क्यों कहते है, साढ़े एक या साढ़े दो क्यों नहीं कहते ? Why do we say 1:30 or 2:30 in the afternoon, one and a half or two and a half, why not say one and a half or two and a half? nkp

दोपहर के 1:30 या 2:30 को हम डेढ़ या ढ़ाई क्यों कहते है, साढ़े एक या साढ़े दो क्यों नहीं कहते ?

नई दिल्ली। बचपन में हम कई बार दोपहर के 1:30 या 2:30 बजे को साढ़े एक या साढ़े दो कह देते थे। अगर सामने वाला बड़ा होता था तो उसका दिमाग चकरा जाता था और फिर उसकी हंसी छूट जाती थी। समझ आने पर पता चला कि दोपहर के 1:30 या 2:30 को साढ़े एक या साढ़े दो नहीं कहते। हालांकि, 3:30 या 4:30 वगैरह आदि को हम साढ़े तीन या साढ़े चार बोल सकते हैं। ऐसे में आपके मन में भी ये सवाल जरूर आया होगा कि आखिर हम 1:30 या 2:30 को साढ़े एक या साढ़े दो क्यों नहीं बोल सकते?

यह फंडा केवल टाइम के साथ ही नहीं है

यह फंडा केवल टाइम के साथ ही नहीं, बल्कि रूपयों-पैसों के साथ भी है। हम गिनती में 150 को डेढ सौ और 250 को ढाई सौ कहते हैं। इसी तरह डेढ़ किलो, ढाई किलो... डेढ मीटर, ढाई मीटर... डेढ़ लीटर, ढाई लीटर वगैरह बोला जाता है। हम भारतीयों के अभ्यास में यह बैठ गया है। अब तो हमारे मुंह से साढ़े एक या दो तो निकलता ही नहीं है।
भारत में जो गिनती का सिस्टम सदियों से चलता आ रहा है, उसमें डेढ़ और ढाई के अलावा सवा, पौने वगैरह का भी प्रचलन में है। ये शब्द फ्रैक्शन में चीजों को बताते हैं। अब सवाल उठता है कि ये फ्रैक्शन क्या होता है? आइए जानते हैं

फ्रैक्शन संख्या किसे कहते हैं?

फ्रैक्शन (Fraction) होती है किसी पूर्ण संख्या के किसी भाग या हिस्से को बताने वाली संख्या। यानी दो पूर्ण संख्याओं का भागफल फ्रैक्शन है। जैसे किस 3 में 2 भाग दिए जो आया डेढ़। अलग-अलग देशों में फ्रैक्शन के लिखने के तरीके अलग-अलग होते हैं। हालांकि भारत के फ्रैक्शन संख्या को काफी उन्नत माना जाता है।

ज्योतिष विद्या में भी इसका इस्तेमाल किया जाता है

ज्योतिष विद्या में भी फ्रैक्शन के अंकों का इस्तेमाल किया जाता है। भारत में वजन और समय को फ्रैक्सन में नापा जाता है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार फ्रैक्शन संख्या शुरूआत से ही मूल गणित के शब्द रहे हैं। पुराने समय में एक चौथाई, सवा, पौने, डेढ़ और ढाई तक के पहाड़े भी पढ़ाए जाते थे।

वैज्ञानिक कारण क्या है

इसके अलावा 1:30 और 2:30 को डेढ और ढ़ाई कहने के पीछे वैज्ञानिक कारण भी है। माना जाता है कि साढ़े एक की बजाय डेढ़ और साढ़े दो की बजाय ढाई कहने में समय भी बचता है।

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