Lakshman Rekha: लक्ष्मण रेखा की लाइन पार करते ही क्यों मर जाती हैं चीटियां? इसमें ऐसा क्या होता है?

Lakshman Rekha: चीटियां एक प्रकार की कीट होती हैं जो हमारे आस-पास पाए जाती हैं और अक्सर घरों में या खाद्य स्थानों पर पाए जाती हैं।

Lakshman Rekha: लक्ष्मण रेखा की लाइन पार करते ही क्यों मर जाती हैं चीटियां? इसमें ऐसा क्या होता है?

Lakshman Rekha: चीटियां एक प्रकार की कीट होती हैं जो हमारे आस-पास पाए जाती हैं और अक्सर घरों में या खाद्य स्थानों पर पाए जाती हैं। जब हमें चीटियों के आक्रमण का सामना होता है, हमें इंट्सेक्टाइड्स या कीटनाशक दवाओं का इस्तेमाल करना पड़ता है।

इंट्सेक्टाइड्स का उपयोग चीटियों और अन्य कीटों को मारने के लिए किया जाता है, लेकिन क्या वाकई चीटियां चीटियों द्वारा बनाई गई रेखा (एंट लाइन) को पार करने के बाद मर जाती हैं?

इस बारे में वास्तविकता क्या है? चलिए, हम इस मुद्दे  में विस्तार से चर्चा करें।

चीटियां की  संगठन के बारे में जानकारी हमें इस मामले में समझदारी देती है। चीटियां सामुदायिक जीवन बिताने वाले कीट हैं जो अपने कॉलोनी में व्यवस्थित रूप से रहती हैं। वे अपने साथी चीटियों के साथ सहयोग करती हैं, भोजन की खोज में मदद करती हैं और अपने बच्चों को पालती हैं।

[caption id="attachment_234879" align="alignnone" width="889"]ant-3चीटियों की उर्म  कुछ महीनों से लेकर कई वर्षों तक हो सकती है, और वे अपने आकार, रंग और जीवनचक्र के विभिन्न चरणों में बदलती रहती हैं।[/caption]

इंट्सेक्इटीसाइड्स, जैसे कीटनाशक दवाएं, एंटरप्रेन्योइड्स, या अन्य कीटनाशक उत्पादों के रूप में उपयोग होते हैं जो चीटियों के विकास, विस्तार, और जीवन प्रक्रियाओं पर प्रभाव डालते हैं।

अस्थायी रूप से विकलांग

इसके अलावा, कुछ इंट्सेक्इटीसाइड्स  शक्तिशाली न्यूरोटोक्सिन हो सकते हैं जो चीटियों के न्यूराल संचार पथ पर सीधे प्रभाव डाल सकते हैं और उन्हें मार सकते हैं। इंट्सेक्टाइड्स के इस प्रकार के प्रभाव से, चीटियों की दिमागी गतिविधि, मांसपेशियों का कार्य, और अन्य महत्वपूर्ण कार्यक्षमताओं पर असाधारण प्रभाव पड़ता है।

जिसके चलते चीटियों की मृत्यु हो सकती है या वे अस्थायी रूप से विकलांग हो सकती हैं।

इंट्सेक्इटीसाइड्स के इस्तेमाल का मुख्य उद्देश्य चीटियों के आक्रमण को नियंत्रित करना होता है, लेकिन इसके अलावा भी इसका प्रभाव अन्य प्राणियों और पर्यावरण पर हो सकता है, जो जरूरी है कि हम इसका हमें ध्यान रखना चाइए ।

चीटियां रास्ता कैसे ढूंढती हैं?

चीटियां आपको हमेशा एक कतार में चलती नजर आएंगी। अगर पहली चींटी ने अपना रास्ता थोड़ा-सा भी बदला या टेढ़ा किया, तो उसके पीछे की सारी चीटियां भी उसी रास्ते पर चलना शुरू कर देती हैं। दरअसल, जब चीटियां भोजन की तलाश में निकलती है तो इनके आगे रानी चींटी चलती है।

ये अपनी बॉडी से फेरोमोंस नाम का एक खास रसायन को छोड़ती है। बाकी सभी चीटियां इसी रसायन की गंध को फॉलो करती है। जिससे एक लाइन बन जाती है।

चीटियां की होती है कॉलोनीयां ? 

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इस तरह फूड और कॉलोनी तक एक पाथ क्रिएट हो जाता है। जिसे फॉलो करते हुए सभी चीटियां फूड को अपनी कॉलोनी तक लेकर जाती हैं। फूड और कॉलोनी के रास्ते में खींची जाने वाली लक्ष्मणरेखा चॉक की लाइन में साइपरमेथ्रिन और डेल्टामेथ्रिन जैसे दूसरे कॉन्टैक्ट इंसेक्टिसाइड फ्लोर पर फैल जाते हैं।

लाइन को पार करने पर क्या होता है?

इस लाइन को पार करती है, वैसे ही ये साइपरमेथ्रिन न्यूरोटोक्सिन उसके नर्वस सिस्टम में ट्रैवल कर रहे सिग्नल्स को ब्लॉक कर देता है। इस तरह धीरे-धीरे उसके शरीर के सभी अंग काम करना बंद कर देते हैं, जिससे तड़प-तड़प कर उसकी मौत हो जाती है। लक्ष्मणरेखा का ऐसा ही असर कोकरोच पर भी होता है।

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