जन्मदिन पर केक पर लीग मोमबत्तियां क्यों बुझाई जाती है? क्या आपको पता है

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जन्मदिन पर केक पर लीग मोमबत्तियां क्यों बुझाई जाती है? क्या आपको पता है

Candles on Cake Extinguished : हर साल हम और आप अपने जन्मदिन का इंतजार करते है। हम अपने जन्मदिन के मौके पर केक काटते है, लोग हमे जन्मदिन की बधाईयां देते है। जन्मदिन का दिन हर इंसान के लिए बेहद खास दिन होता है। जन्मदिन के खास दिन को यादगार बनाने के लिए लोग कई तरीके से सेलिब्रेट करते है। जन्मदिन तो सभी मनाते है, केक काटते है, पार्टी करते है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जन्मदिन के मौके पर केक पर लगी मोमबत्तियां क्यों बुझाई जाती है? क्या आपको पता है, नहीं ना तो आइए आपको बताते है।

सबसे पहले आपको बता दें कि जन्मदिन के मौके पर केक की मोम​बत्तियां बुझाने का रिवाज भारत का नहीं है। यह रिवाज विदेशी रिवाज है। इस रिवाज को भारत मेंं कई सालों से निभाई जा रही है। हालंकि भारत में इस रिवाज को अशुभ माना जाता है, लेकिन भारत में आज भी यह परंपरा निभाई जा रही है।

अब बात करते है की मोमबत्तियां बुझाने की परंपरा आई कहां से? दरसअल, यह परंपरा ग्रीस यूनान से आई है। ग्रीस के पुराने लोग जन्मदिन के मौके पर केक और मोम​बत्तियां लेकर ग्रीक भगवान के पास जाते थे। ग्रीक भगवान के पास जाकर लोग उन मोमबत्तियों से केक पर ग्रीक भगवान का चिह्न बनाते थे।

इसलिए बुझाई जाती है मोमबत्तियां

इंटरनेट के डाटा के अनुसार केक पर ग्रीक भगवान का चिह्न बनाकर मोमबत्तियों को बुझा दिया जाता था। मोमबत्तियों को बुझाने के पीछे की वजह यह थी कि मोमबत्तियों से निकलने वाला धुआं आसपास भैल जाए। क्योंकि यूनानी लोग मोमबत्ती के धुएं को काफी शुभ मानते थे उनका मानना था कि धुआं ऊपर उड़ता हुआ जाता है तो उनकी प्रार्थनाओं स्वीकार होती है। इसलिए यूनानी लोग केक पर लगी मोम​बत्तियों को बुझा देते थे। तब से ही यह परंपरा पूरी दुनिया में अपनाई जाने लगी।

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