सरकार के खिलाफ कोर्ट पहुंचा Whatsapp, सोशल मीडिया गाइडलाइंस को किया चैलेंज, कहा- प्राइवेसी को खत्म कर देगी नई नीति

सरकार के खिलाफ कोर्ट पहुंचा Whatsapp, सोशल मीडिया गाइडलाइंस को किया चैलेंज, कहा- प्राइवेसी को खत्म कर देगी नई नीति

सरकार के खिलाफ कोर्ट पहुंचा Whatsapp, सोशल मीडिया गाइडलाइंस को किया चैलेंज, कहा- प्राइवेसी को खत्म कर देगी नई नीति

नई दिल्ली: सबसे बड़ी मैसेजिंग ऐप व्हाट्सएप केंद्र सरकार के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट पहुंची है। व्हाट्सएप ने ये याचिका तीन पहले सरकार द्वारा जारी नई गाइडलाइन के खिलाफ लगाई है, जिसमें सरकार का कहना है कि वॉट्सऐप और उस जैसी कंपनियों को अपने मैसेजिंग ऐप पर भेजे गए मैसेज के ओरिजिन की जानकारी अपने पास रखनी होगी।

वहीं इस बारे में व्हाट्सएप का कहना है कि अगर ऐसा होता है तो सोशल मीडिया को लेकर भारत सरकार की नई गाइडलाइन भारत के संविधान के मुताबिक यूजर्स की प्राइवेसी के अधिकारों का उल्लंघन करती है।

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न्यूज एजेंसी के मुताबिक, कंपनी का कहना है कि सरकार के इस फैसले से लोगों की प्राइवेसी खत्म हो जाएगी। इस बारे में कंपनी के प्रवक्ता का कहना है कि मैसेजिंग ऐप से चैट को इस तरह से ट्रेस करना लोगों की निजता के अधिकार को उल्लंघन करना होगा। इसके साथ ही ये हमारे द्वारा वॉट्सऐप पर भेजे गए सारे मैसेज पर नजर रखने जैसा हो जाएगा, जिसमें कि एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन को कोई औचित्य नहीं रहेगा।

नई गाइडलाइन के अनुसार कंपनियों को बताना होगी यूजर्स की पहचान

नई गाइडलाइन के मुताबिक सोशल मीडिया कंपनियों को उस यूजर्स की पहचान बतानी होगी जिसने सबसे पहले किसी मैसेज को पोस्ट या शेयर किया है। बता दें कि सरकार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के लिए इसी साल 25 फरवरी को गाइडलाइन जारी की थी और इन्हें लागू करने के लिए 3 महीने का समय दिया था। डेडलाइन मंगलवार यानी 25 मई को खत्म हो गई।

सरकार ने सोशल मीडिया के लिए क्या गाइडलाइंस जारी की?

1. ये प्लेटफॉर्म ये भी बताएं कि शिकायत दर्ज करवाने की व्यवस्था क्या है। अधिकारी शिकायत पर 24 घंटे के भीतर ध्यान दें और 15 दिन के भीतर शिकायत करने वाले को बताएं कि उसकी शिकायत पर एक्शन क्या लिया गया और नहीं लिया गया तो क्यों नहीं लिया गया।

2. ऑटोमेटेड टूल्स और तकनीक के जरिए ऐसा सिस्टम बनाएं, जिसके जरिए रेप, बाल यौन शोषण के कंटेंट की पहचान करें। इसके अलावा इन पर ऐसी इन्फर्मेशन की भी पहचान करें, जिसे पहले प्लेटफॉर्म से हटाया गया हो। इन टूल्स के काम करने का रिव्यू करने और इस पर नजर रखने के लिए भी पर्याप्त स्टाफ हो।

3. प्लेटफॉर्म एक मंथली रिपोर्ट पब्लिश करें। इसमें महीने में आई शिकायतों, उन पर लिए गए एक्शन की जानकारी हो। जो लिंक और कंटेंट हटाया गया हो, उसकी जानकारी दी गई हो।

4. अगर प्लेटफॉर्म किसी आपत्तिजनक जानकारी को हटाता है तो उसे पहले इस कंटेंट को बनाने वाले, अपलोड करने वाले या शेयर करने वाले को इसकी जानकारी देनी होगी। इसका कारण भी बताना होगा। यूजर को प्लेटफॉर्म के एक्शन के खिलाफ अपील करने का भी मौका दिया जाए। इन विवादों को निपटाने के मैकेनिज्म पर ग्रेवांस अफसर लगातार नजर रखें।

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