मां भद्रकाली की बाईं आंख का क्या है कोहिनूर कनेक्शन, जो बना ब्रिटिश साम्राज्य के पतन का कारण

मां भद्रकाली की बाईं आंख का क्या है कोहिनूर कनेक्शन, जो बना ब्रिटिश साम्राज्य के पतन का कारण

Bhadrakali Jayanti 2022 : आज मां भद्रकाली की जयंती है। (Bhadrakali Jayanti 2022) मां भ्रदकाली देवी पार्वती की सबसे शक्तिशाली रूपों में से एक मानी जाती है। मां भ्रदकाली (Bhadrakali Jayanti 2022)  की पूजा विशेष तौर पर दक्षिण भारत में की जाती है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, माता भद्रकाली, देवी सती की मृत्यु के बाद भगवान शिव की जटाओं से प्रकट हुई थीं। वही कहा जाता है कि जब महाभारत का युद्ध हुआ था तब अर्जुन ने भगवान श्रीकृष्ण के कहने पर मां भद्रकाली (Bhadrakali Jayanti 2022)  की पूजा की थी। इसके बाद ही उन्हें युद्ध मे विजय प्राप्त हुई थी।

राजा पुलकेशिन ने बनवाया था मंदिर

आज हम आपको दक्षिण भारत के वारंगल में स्थित माता भद्रकाली (Bhadrakali Jayanti 2022)  के एक ऐसे मंदिर के बारे में बताने जा रहे है, जिनसे एक दिलचस्प घटना जुड़ी है। मां भद्रकाली का मंदिर (Bhadrakali Jayanti 2022) आंध्र प्रदेश के हनमकोंडा और वारंगल शहरों के बीच एक पहाड़ी पर स्थित है। इस मंदिर में मां भद्रकाली (Bhadrakali Jayanti 2022) उग्र रूप में विराजमान है। मां भद्रकाली (Bhadrakali Jayanti 2022) की प्रतिमा पत्थर की बनी है। इस मंदिर का निर्माण 625 ईस्वी में चालुक्य वंश के राजा पुलकेशिन द्वितीय द्वारा वेंगी क्षेत्र पर मिली जीत के उपलक्ष्य में बनवाया था। बताया जाता है कि काकतीय राजाओं ने एक कोहिनूर हीरे को मां भद्रकाली देवी (Bhadrakali Jayanti 2022) की बाईं आँख में जड़वा दिया था। बाद में मुस्लिम शासकों के हाथों काकतीय वंश का पतन हो गया तो मंदिर (Bhadrakali Jayanti 2022) ने अपने प्रसिद्ध खो दी थी।

अलाउद्दीन खिलजी ने लूट लिया था हीरा

उस दौरान काकतीय राजाओं ने अलाउद्दीन खिलजी से कोहिनूर हीरे की पेशकर करके आक्रमण करने का समझौता किया था। उसके बाद अलाउद्दीन खिलजी ने मलिक कुफूर को कोहिनूर लेने के लिए भेजा था। बताया जाता है कि अलाउद्दीन खिलजी के अधीन दिल्ली सल्तनत ने काकतीयों के साम्राज्य को अपने शासन में मिला लिया और भद्रकाली मंदिर (Bhadrakali Jayanti 2022) को नष्ट कर दिया और बेशकीमती कोहिनूर को लूटकर दिल्ली ले आए। इसके बाद कोहिनूर हीरा बाबर, हुमायूँ, शेर शाह सूरी, शाहजहां, औरंगजेब के हाथों होते हुए महाराजा रणजीत सिंह के तक पहुंचा।

अंग्रेस इंग्लैंड ले गए थे हीरा

महाराज रणजीत पर जब कोहिनूर हीरा था तब उनकी मृत्यू करीब थी। इसलिए उन्होंने ब्रिटिश अधिकारियो से हीरे को जगन्नाथ मंदिर में प्रतिष्ठित कोहिनूर हीरे का स्वामित्व देवता को देने की इच्छा जाहिर की लेकिन ब्रिटिश अधिकारियों ने राजा की इच्छा को नहीं माना। बल्कि वह कोहिनूर हीरे को अपनी रानी को देने के लिए इंग्लैंड ले गए। कहा जाता है कि कोहिनूर हीरा जिसके भी पास रहा उसकी मौत हो गई। लेकिन ब्रिटिश महारानी एलिजाबेथ द्वितीय को कुछ नहीं हुआ। लेकिन हीरा अंग्रेजों के कब्जे में जाने के कुछ साल बाद ही ब्रिटिश साम्राज्य को लगातार अपने पतन का सामना करना पड़ा। यह एक तरह से हीरे का अभिशाप था। इसलिए आज भी महारानी कोहिनूर हीरे को पहनने से बचती है।

किसने कराया मां भद्रकाली का जीर्णोद्धार

​​भद्रकाली मंदिर (Bhadrakali Jayanti 2022) की बात करे तो 1950 के दशक में संपन्न व्यापारियों द्वारा मंदिर को बहाल किया गया। 1950 में एक गुजराती व्यापारी मगनलाल और देवी उपासक गणेश राव शास्त्री द्वारा भद्रकाली मंदिर (Bhadrakali Jayanti 2022) का जीर्णाेद्धार कराया गया।

Share This

0 Comments

Leave a Comment

Login

Welcome! Login in to your account

Remember me Lost your password?

Lost Password