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क्या है Google Starline Project?, जो बदल देगा वीडियो कॉलिंग का अंदाज

क्या है Google Starline Project?, जो बदल देगा वीडियो कॉलिंग का अंदाजWhat is Google Project Starline ?, which will change the style of video calling nkp

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Bansal Digital Desk
क्या है Google Starline Project?, जो बदल देगा वीडियो कॉलिंग का अंदाज

नई दिल्ली। आने वाले दिनों में भारत समेत पूरी दुनिया में वीडियो कॉलिंग का अंदाज बदलने वाला है। Google ने अपने सालाना IO इवेंट में प्रोजेक्ट स्टारलाइन (Project Starline) का ऐलान किया है। जिसके तहत मीलों दूर बैठे व्यक्ति को वीडियो कॉल की जा सकेगी। आप कहेंगे कि इसमें नया क्या है। पहले से ही लोग ऐसा करते आ रहे हैं। लेकिन Google Starline Project में वीडियो कॉलिंग के दौरान आपको ऐसा लगेगा जैसे आप आमने-सामने बात कर रहे हैं।

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3D तकनीक का होगा इस्तेमाल

आसान भाषा में इसे समझे तो Google Starline Project के वीडियो कॉलिंग को 3D अवतार में कन्वर्ट किया जा सकेगा। कॉलिंग के दौरान Google यूजर का रियल लाइफ 3D वर्जन पेश करेगा। अब तक वीडियों कॉलिंग में 2D डायमेंशन का इस्तेमाल किया जाता था। 3D वीडियों कॉल में अब आप सामने वाले व्यक्ति के साथ आई कॉनटैक्ट कर पाएंगे। जिससे ऐास एहसास होगा जैसे आप आमने-सामने बैठकर बातचीत कर रहे हो।

इस तकनीक को गेम चेंजर माना जा रहा है

जानकार गूगल के इस प्रोजेक्ट को गेम चेंजर मान रहे हैं। क्योंकि लॉकडाउन के वक्त ज्यादातर लोग घरों में रहते हैं, ऐसे में वे अपनो से बात करने के लिए वीडियो कॉल का सहारा लेते हैं। अगर अब उन्हें 3D तकनीक की वजह से बेहतर अनुभव मिलेगा तो वे खुद को और सहज महसूस करेंगे। Google का ये तकनीक लोगों के लिए काफी कारगर साबित होने वाला है।

3D होलोग्राम बनाना होगा संभव

मालूम हो कि दिग्गज टेक कंपनियां वर्चुअली मीटिंग के दौरान इस तरह की 3D वीडियो कॉलिंग करती रही है। Microsoft जैसी टेक कंपनियों की तरफ से अपने मिक्सड रिएल्टी प्लेटफॉर्म Mesh को पेश किया जा चुका है। इसी तर्ज पर Google भी अपने प्रोजेक्ट Starline की एक झलक Google के जारी IO कॉन्फ्रेंस में पेश की है। कंपनी की मानें, तो Google Starline प्रोजेक्ट के एंडवांस्ड हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर के साथ पेश किया गया है, जिससे दोस्तों, परिवार के लोगों और सहकर्मियों को एक साथ होने का एहसास कराया जा सकेगा, जो मौजूदा वक्त में अलग-अलग जगह से काम कर रहे हैं। Google के मुताबिक कंप्यूटर विजन, मशीन लर्निंग, spatial ऑडियो की वजह से रिएलिस्टिक 3D होलोग्राम को संभव बनाया जा सका है।

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