WB Train Accident: न्‍यू जलपाईगुड़ी जैसे ट्रेन हादसे रोकने के लिए पूरे ट्रैक पर कवच लगाने में रेलवे को लगेंगे 23 साल!

West Bengal Train Accident: जिस स्पीड से ट्रैक पर कवच सिस्टम लग रहे हैं, उस हिसाब से इसे पूरा होने में 23 साल लग जाएंगे...

WB Train Accident: न्‍यू जलपाईगुड़ी जैसे ट्रेन हादसे रोकने के लिए पूरे ट्रैक पर कवच लगाने में रेलवे को लगेंगे 23 साल!

हाइलाइट्स

  • न्यू जलपाईगुड़ी में हुआ भीषण रेल हादसा
  • रेल हादसे वाले ट्रैक पर नहीं लगा कवच सिस्टम
  • इस साल के अंत तक पश्चिम बंगला में लगेगा सिस्टम

West Bengal Train Accident: पश्चिम बंगाल के न्यू जलपाईगुड़ी में हुए भीषण रेल हादसे (Kanchenjunga Express Accident) के बाद एक बार फिर रेलवे में सुरक्षा के लिए उपयोग किये जाने वाला कवच सिस्टम चर्चा में आ गया है।

रेलवे बोर्ड की चेयरपर्सन और सीईओ जया वर्मा सिन्हा ने बताया कि हादसे वाला रेलवे ट्रैक पर कवच सिस्टम नहीं लगा है। अभी ये सिर्फ 1500 किमी के ट्रेक पर लगाया गया है।

ऐसे में सवाल खड़ा होता है कि आखिर पूरे देश में ऐसे रेल हादसों को रोकने के लिए कवच सिस्टम (Kavach System) कब तक लगाया जाएगा, तो हम आपको बता दें कि देश के पूरे रेलवे ट्रैक में लगने में इसे 23 साल से अधिक का समय लग सकता है।

2047 तक पूरे ट्रैक पर लगेगा कवच सिस्टम

अभी तक कवच सिस्टम सिर्फ 1500 किमी के ट्रैक पर लगाया गया है, जबकि पूरे देश में रेलवे ट्रैक की लंबाई 68 हजार किमी है। मतलब 66 हजार 500 किमी के ट्रैक पर कवच सिस्टम लगाया जाना है।

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रेलवे बोर्ड की चेयरपर्सन और सीईओ जया वर्मा सिन्हा की मानें तो इस साल 3 हजार किमी ट्रैक पर ये कवच सिस्टम लग जाएगा। यदि कवच सिस्टम को लगाने की यही स्पीड रही तो इसे देश के पूरे ट्रैक में लगाने में 23 साल 4 महीने का समय लग सकता है।

यानी पश्चिम बंगाल जैसे रेल हादसों (West Bengal Train Accident) को रोकने के लिए जरुरी कवच सिस्टम आजादी के 100वे साल में मार्च-अप्रैल माह तक पूरे ट्रैक पर लग सकता है।

क्या है रेलवे का कवच सिस्टम

कवच सिस्टम रेलवे का एक ऑटोमेटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम (Train Protection System) है। यह कई इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस का सेट होता है।

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ट्रेन हादसे (West Bengal Train Accident) का शिकार न हों इसके लिए इसमें रेडियो फ्रिक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन डिवाइसेस को ट्रेन, ट्रैक, रेलवे सिग्नल सिस्टम और हर स्टेशन पर एक किलोमीटर की दूरी पर इंस्टॉल किया जाता है।

इस सिस्टम में दूसरे कंपोनेंट्स से अल्ट्रा हाई रेडियो फ्रिक्वेंसी के जरिए जुड़े रहते हैं।

कवच सिस्टम ऐसे देता है सुरक्षा

अगर कोई लोको पायलट यानी ट्रेन का ड्राइवर किसी सिग्नल को जंप करता है तो कवच सिस्टम एक्टिव हो जाता है। कवच सिस्टम के एक्टिव होते ही ट्रेन के पायलट को अलर्ट पहुंचता है।

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इतना ही नहीं कवच सिस्टम ट्रेन के ब्रेक्स का कंट्रोल भी ले लेता है। अगर कवच सिस्टम को यह पता चले की ट्रैक पर दूसरी ट्रेन आ रही है तो वह पहली ट्रेन के मूवमेंट को भी रोक देता है।

सामान्य शब्दों में कहें तो कवच सिस्टम आपातकालीन स्थिति में खुद-ब-खुद ट्रेन को रोक देता है यानि ब्रेक लगा देता है। इससे पश्चिम बंगाल जैसे रेल हादसों (West Bengal Train Accident) पर लगाम लग सकेगी।

कवच लगाने 557 करोड़ का बजट

बता दें कि कवच सिस्‍टम लगाना एक महंगा काम है। रेलवे मंत्रालय द्वारा बताया गया था कि अंतरिम बजट 2024-25 में रेलवे ट्रेक में 'कवच' की स्थापना के लिए 557 करोड़ रुपये से अधिक का आवंटन किया गया है।

https://twitter.com/BansalNewsMPCG/status/1802698853138747816

इस साल यह 3 हजार किमी ट्रैक पर लगाया जाएगा। पूरे ट्रैक पर सिस्टम लगने के बाद रेल हादसों (West Bengal Train Accident) में कमी आएगी।

ओडिशा रेल हादसे में भी उठे थे सवाल

ओडिशा में 2 जून 2023 की शाम हुए रेल हादसे के बाद भी कवच सुरक्षा प्रणाली को लेकर सवाल उठने लगे थे कि आखिर ये देश में कब तक लग जाएगा।

[caption id="attachment_351542" align="alignnone" width="859"]Odisha-Train-Accident ओडिशा के बालासोर में हुए रेल हादसे की तस्वीर                                                                                                                             Image Credit source: PTI[/caption]

बता दें कि ओडिशा के बालासोर में तीन ट्रेने आपस में भिड़ गईं। इन तीन ट्रेनों (Odisha train accident) में एक माल गाड़ी थी जबकि दो पैसेंजर ट्रेन थीं।

इस Train Accident में 288 जानें असमय चली गईं और लगभग एक हजार लोग घायल हुए थे।

रेलवे बोर्ड की चेयरपर्सन ने ये कहा

रेलवे बोर्ड की चेयरपर्सन और सीईओ जया वर्मा सिन्हा ने कहा कि कवच सिस्‍टम को दिल्ली-गुवाहाटी रूट पर लगाए जाने की योजना बनाई गई है। हमें ह्यूमन एरर पर भी नियंत्रण रखना होगा।

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कवच 1500 किमी में लगाया गया है। इस साल 3000 और किलोमीटर में कवच लग जाएगा। इस साल जो 3000 किमी में कवच लीज हैं, उनमें पश्चिम बंगाल (West Bengal Train Accident) भी शामिल है।

...जब मंत्री और चेयरमैन की ट्रेन आ गई थी आमने सामने

कवच रेलवे सिस्टम का पहला टेस्ट मार्च 2022 में हुआ था। इस टेस्ट के दौरान एक इंजिन में खुद रेल मंत्री अश्विन वैष्णव और दूसरे में रेलवे बोर्ड के तत्कालीन चेयरमैन विनय कुमार त्रिपाठी थे।

West-Bengal-Train-Accident-Ashwani-Veshnawa

दोनों ट्रेन को एक ही ट्रैक पर आमने-सामने लाया गया। दोनों ट्रेनों की स्पीड थी 50 किलोमीटर प्रति घंटा थी। आमने-सामने आने के बावजूद दोनों ही ट्रेन 380 मीटर पहले रुक गई थी।

कुछआ चाल से चलता सिस्टम

रेल हादसों (West Bengal Train Accident) को रोकने के लिए कवच सिस्टम एक कारगर उपाय है, लेकिन कवच को लगाने वाला सिस्टम कछुआ चाल से चल रहा है।

रेलवे ने इस कवच सिस्टम पर 2012 में काम शुरू किया था, लेकिन इसका पहला ट्रायल होने में ही दस साल लग गए। इसका पहला औपचारिक टेस्ट चार मार्च 2022 को हुआ था।

उसके बाद एक साल में यह 1500 किमी लंबे ट्रैक पर इंस्टॉल किया गया। 2023-24 में इसमें कोई खास प्रोग्रेस नहीं हुई।

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