पतंग उड़ाने की परंपरा और इसके पीछे के दिलचस्प कारण

भारत में मकर संक्रांति पर पतंग उड़ाना एक परंपरा है। इसे सूर्य देव के स्वागत और नई फसल की खुशी का प्रतीक माना जाता है।

कड़कड़ाती ठंड के बाद धूप में समय बिताने से शरीर को भरपूर Vitamin D मिलता है, जो त्वचा और हड्डियों के लिए अच्छा है।

पतंग उड़ाने से मानसिक एकाग्रता (Concentration) बढ़ती है। हवा की दिशा के साथ संतुलन बनाना दिमाग को तेज करता है।

पतंग स्वतंत्रता और मानवीय आकांक्षाओं का प्रतीक माना जाता है। ये लक्ष्य ऊंचा रखने, डोर (जड़) से जुड़े रहने का संदेश देती है।

यह त्योहार लोगों को जोड़ने का काम करता है। छतों पर होने वाली प्रतिस्पर्धा से आपसी प्रेम और भाईचारा बढ़ता है।

मान्यताओं के अनुसार, त्रेतायुग में भगवान श्री राम ने पतंग उड़ाई थी, जो इंद्रलोक तक गई थी। तभी से यह परंपरा चली आ रही है।

तो इस बार सुरक्षित डोर का उपयोग करें और खुशियों की पतंग उड़ाएं! आपको पतंग उड़ाना कैसा लगता है? कमेंट में बताएं।