वरुण मुद्रा शरीर में वाटर एलिमेंट को बैलेंस करने के लिए जानी जाती है। कनिष्ठा उंगली के सिरे को अंगूठे के सिरे से टच करके इसकी प्रैक्टिस की जाती है, इसके रेगुलर प्रैक्टिस से पेट, स्किन और जोड़ों में कुछ चेंज होता हैं।
बैठकर हाथों को घुटनों पर रखें और छोटी उंगली को अंगूठे से मिलाकर तीन उंगलियां सीधी रखें। आंखें बंद करके सांस लेते रहें।
इफेक्टिव रिजल्ट के लिए इसे डेली 15 से 20 मिनट तक करें या दिन में 3 बार 15-15 मिनट के लिए भी कर सकते हैं।
यह मुद्रा शरीर को हाइड्रेटेड रखता है, जिससे चेहरे पर नेचुरल ग्लो आता है और स्किन दमकने लगती है।
यह ब्लड को शुद्ध करती है, जिससे कील-मुँहासे, फोड़े-फुंसी और अन्य चर्म रोगों में राहत मिलती है।
शरीर में लिकिव्ड फ्ल्यूइड लेवल बनाए रखकर डाइजेस्टिव सिस्टम को मजबूत करती है और कब्ज प्रॉब्लम को दूर करने में मदद करती है।
यह मुद्रा पेट में बनने वाले ज्यादा एसिड को कंट्रोल करने और पेट के अल्सर में भी लाभकारी मानी जाती है