मान्यता है कि वाराणसी गंगा किनारे भगवान शिव की त्रिशूल की नोक पर बसी है, जहां मृत्यु के बाद मोक्ष की प्राप्ति होती है।
विश्वनाथ गली स्थित इस मंदिर में गणेश जी के हाथ में कलम और पुस्तक है, पंचकोसी यात्री यहीं से यात्रा पूर्ण मानते हैं।
केदारघाट पर स्थित इस लिंग के दर्शन से केदारनाथ से सात गुना पुण्य मिलने की मान्यता प्राचीन ग्रंथों में वर्णित है।
इस मंदिर में शिव के रौद्र रूप की पूजा होती है, मान्यता है कि महादेव से पहले यहां दर्शन करना आवश्यक माना जाता है।
लोहटिया में स्थित 40 खंभों वाला यह मंदिर भगवान गणेश को ऋद्धि-सिद्धि और शुभ-लाभ के साथ विराजमान दिखाता है।
मणिकर्णिका घाट पर स्थित यह मंदिर 9 डिग्री झुका है और साल के अधिकतर समय गंगाजल में डूबा रहता है।
ये मंदिर भगवान शिव को भोजन कराने वाली अन्नपूर्णा देवी को समर्पित है। इस मंदिर में दर्शन करने से अन्न-धन का अभाव नहीं होता है साथ ही मोक्ष भी मिलता है।