इंडियन सिविल सर्विस की नौकरी ठुकराई, ऐसे थे सुभाषचंद्र बोस

नेता जी सुभाषचंद्र बोस की 23 जनवरी को जयंती है। इसे पराक्रम दिवस के रूप में मनाया जाता है।

कुछ ऐसी बातें जो नेता जी के बारे में आप शायद ही जानते होंगे।

नेता जी ने 1920 में इंडियन सिविल सर्विस की परीक्षा में टॉप-5 में जगह बनाई थी। फिर भी अंग्रेजी हुकूमत की सेवा नहीं करने के लिए नौकरी ठुकरा दी।

बोस स्वामी विवेकानंद से बेहद प्रभावित थे। वे गीता और उपनिषदों का गहरा अध्ययन करते थे।

बोस 7 से ज्यादा भाषाएं जानते थे। हिंदी, बंगाली, अंग्रेजी, जर्मन, फ्रेंच, इतालवी और जापानी पर उनकी पकड़ थी।

जर्मनी में रहते समय नेता जी नकली नाम और पहचान के साथ काम करते थे ताकि ब्रिटिश इंटेलिजेंस उन्हें पकड़ न सके। उनका कोड नेम ऑरलैंडो माजोता था।

सुभाषचंद्र बोस ने आजाद हिंद फौज में रानी झांसी रेजिमेंट बनाई। ये एशिया की पहली पूर्ण महिला सैनिक टुकड़ी थी। ये उस दौर में क्रांतिकारी सोच थी।

बोस और महात्मा गांधी की विचारधारा अलग थीं। फिर भी बोस ने गांधी जी को 'राष्ट्रपिता' कहकर संबोधित किया।

जब आजाद हिंद सरकार ने अंडमान-निकोबार को मुक्त किया तो नेता जी ने अंडमान को शहीद द्वीप और निकोबार को स्वराज द्वीप नाम दिया था। हालांकि ये नाम प्रचलित नहीं हुए।

'जय हिंद' का नारा नेता जी और आजाद हिंद फौज की देन है।