नीलकंठ को पवित्र और शुभ पक्षी माना जाता है, लेकिन यह रोजाना नजर नहीं आता।
देश में दशहरे पर नीलकंठ पक्षी के दर्शन का विशेष महत्व माना जाता है। लेकिन ये कम नजर क्यों आता है।
नीलकंठ खुले खेतों और पेड़ों वाले इलाकों में मिलता है।
शहरों में नीलकंठ का रहना मुश्किल हो गया है।
नीलकंठ खाने के लिए छोटे कीड़े, टिड्डे और तितलियों पर निर्भर है। कीटनाशकों के इस्तेमाल से उसका प्राकृतिक भोजन कम हो गया है।
नीलकंठ पेड़ों पर बैठकर शिकार करने वाला पक्षी है। वनों की कटाई और पेड़ों की कमी से नीलकंठ पर बुरा असर पड़ा है।
नीलकंठ अक्सर ऊंचाई पर उड़ता है और बड़े पेड़ों की डालियों पर बैठा रहता है। इसलिए लोगों को कम नजर आता है।