आज के समय में हृदय रोगों का उम्र से कोई संबंध नहीं बचा है। 20 साल की उम्र में लोग दिल के दौरे का शिकार हो रहे हैं।
स्वस्थ हृदय के लिए योगासन न केवल एक निवारक (प्रिवेंटिव) उपाय है बल्कि उपचारात्मक तौर पर भी फायदेमंद है।
ताड़ासन रीढ़ की हड्डी और हृदय को मजबूत करने में मदद करता है। इसमें शामिल गहरी श्वासों से फेफड़े भी फैलते हैं।
वृक्षासन एक स्थिर व संतुलित पोस्चर विकसित करने में मदद करता है। यह कंधों को चौड़ा करता है और दिल को खोलता है, जिससे व्यक्ति आत्मविश्वास और खुशी महसूस करता है।
वीरभद्रासन शरीर में संतुलन व बल बढ़ाता है। यह रक्त संचार को बेहतर करता है तथा तनाव से राहत देता है। यह हृदय गति को नियंत्रण में रखता है।
धनुरासन हृदय क्षेत्र को खोलता है तथा मजबूत बनाता है। यह स्फूर्तिदायक है और पूरे शरीर को लचीला बनाता है।
यह योगासन छाती की मांसपेशियों को मजबूत करता है और फेफड़ों का विस्तार करता है, जिससे उनकी क्षमता बढ़ती है।