देर रात मोबाइल, तनाव, अनियमित दिनचर्या और गलत लाइफस्टाइल नींद की कमी के बड़े कारण हैं, जो दिमाग को धीरे-धीरे नुकसान पहुंचाते हैं।
नींद पूरी न होने पर दिमाग नई जानकारी सही से स्टोर नहीं कर पाता, जिससे भूलने की आदत बढ़ती है और ध्यान कमजोर होने लगता है।
नींद की कमी से दिमाग सुस्त हो जाता है, फैसले लेने में दिक्कत, कन्फ्यूजन और रिएक्शन टाइम धीमा हो जाता है।
जब दिमाग को पूरा आराम नहीं मिलता, तो तनाव हॉर्मोन बढ़ते हैं, जिससे गुस्सा, मूड स्विंग्स और बेचैनी बढ़ जाती है।
लंबे समय तक नींद की कमी भावनात्मक संतुलन बिगाड़ देती है, जिससे डिप्रेशन, घबराहट और नकारात्मक सोच का खतरा रहता है।
नींद की कमी से लंबे समय तक किसी काम पर ध्यान नहीं लगता, जिससे काम की गति धीमी और गलतियां ज्यादा हो जाती हैं।
नींद पूरी न होने से ऑफिस परफॉर्मेंस और पढ़ाई दोनों प्रभावित होती हैं, जिससे आत्मविश्वास और उत्पादकता घटती है।
रोज तय समय पर सोएं, मोबाइल दूर रखें, हल्का भोजन करें, व्यायाम करें और तनाव कम करें, ताकि दिमाग स्वस्थ रहे।