Weather Update: देश में भीषण गर्मी के बाद कोहराम मचाएगा La Nina! इस बार ज्यादा बारिश का अनुमान; IMD ने दिया ताजा अपडेट

Weather Update: IMD के अनुसार La Nina की वजह से भारत में इस बार सामान्य से अधिक बारिश होने की संभावना है। लोगों को गर्मी से भी राहत मिलेगी।

Weather Update: देश में भीषण गर्मी के बाद कोहराम मचाएगा La Nina! इस बार ज्यादा बारिश का अनुमान; IMD ने दिया ताजा अपडेट

Weather Update: देश में मई के महीने में भीषण गर्मी (Weather Update) ने तबाही मचाई हुई। लोग घर से बाहर निकलने से बच रहे हैं। वहीं, आईएमडी ने बताया कि मौसम में जल्द ही बदलाव आने वाला है। मौसम में परिवर्तन का कारण ला नीना का एक्टिव होना है।

जबकि अल नीनो समाप्त हो रहा है। अल नीनो के एक्टिव होने के कारण ही सूखा और भीषण गर्मी (Weather Update) पड़ती है, जबकि ला नीना के एक्टिव होने के बाद सामान्य से ज्यादा बरसात होती है। मौसम विभाग के मुताबिक, इस बार देश में ला नीना अपना रौद्र रूप दिखा सकता है।

ला नीना और अल नीनो से होता है मौसम प्रभावित

IMD के मुताबिक, देश में जून से लेकर सितंबर तक मानसून जमकर बरसने (Weather Update) वाला है, क्योंकि जून से लेकर सितंबर के बीच ला नीना एक्टिव हो सकता है। बता दें कि भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में अल नीनो और ला नीना से मौसम में हलचलें होती हैं। अल नीनो से देश में तापमान में बढ़ता है तो दूसरी तरफ ला नीना से तापमान में गिरावट लाता है, जिससे लोगों को गर्मी से राहत मिलगी।

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किसी भी दिन आ सकता है मानसून

मौसम विभाग के अनुसार, किसी भी समय केरल में दक्षिण-पश्चिम मानसून (Weather Update) आना सकता है। ला नीना की वजह से इस साल सामान्य से अधिक बारिश होने के आसार हैं। हालांकि, मानसून की बारिश को प्रभावित करने वाले कई और अन्य कारण हैं, लेकिन महत्वपूर्ण कारण ला नीना को ही माना जा रहा है। इस बार ला नीना की वजग से अगस्त और सितंबर में ज्यादा बारिश होने की उम्मीद है।

जुलाई में सक्रिय हो सकता है ला नीना

ला नीना को भारत मानसून (Weather Update) के लिए अनुकूल माना जाता है। मौसम विभाग के मुताबकि, इस बार जुलाई तक ला नीना पूरी तरह से एक्टिव हो जाएगा। इसके कारण दक्षिण प्रायद्वीपीय और मध्य भारत में सामान्य से ज्यादा वर्षो होने की उम्मीद है, जबकि उत्तर-पश्चिम भारत में सामान्य बारिश होगी।

माना जा रहा है कि इस बार पूर्व और पूर्वोत्तर भारत में जून से सितंबर के बीच औसत से कम बारिश होने की संभावना है। अधिक वर्षो के कारण कुछ क्षेत्रों में बादल फटने, भूस्खलन और बाढ़ की घटनाएं हो सकती हैं।

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