Vyapam Scam: व्यापमं महाघोटाले में 2 डॉक्टर आरोपियों को 4-4 साल की सजा; जानें मामला

Vyapam Scam: व्यापमं महाघोटाले में 2 डॉक्टरों को 4-4 साल की सजा, 13 हजार 100 रुपए का जुर्माना; जानें क्या है पूरा मामला

Vyapam Scam: व्यापमं महाघोटाले में 2 डॉक्टर आरोपियों को 4-4 साल की सजा; जानें मामला

   हाइलाइट्स

  • व्यापमं महाघोटाले में 2 डॉक्टरों को 4-4 साल की सजा।
  • दोनों पर 13 हजार 100 रुपए का जुर्माना भी लगाया।
  • CBI अजय सिंह की अदालत ने सुनाई सजा।

ग्वालियर| Vyapam Scam: मध्यप्रदेश के बहुचर्चित व्यापमं महाघोटाले मामले को भले ही 10 साल से ज्यादा हो चुके हैं, लेकिन अब भी इस केस की कार्रवाई जारी है। इसी कड़ी में हाल ही में विशेष न्यायाधीश CBI अजय सिंह की अदालत ने 2 डॉक्टरों को 4-4 साल की सजा और दोनों पर 13 हजार 100 रुपए का जुर्माना लगाया है। ऐसा  पहली बार हुआ है, जब एक केस में दो डॉक्टर को 4-4 साल की सजा एक साथ सुनाई गई है।

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   न्यायाधीश अजय सिंह ने सुनाई सजा

प्री-पीजी परीक्षा में फर्जीवाड़े के आरोपी डॉ. आशुतोष गुप्ता और डॉ. पंकज गुप्ता को विशेष न्यायाधीश अजय सिंह ने 4-4 साल की सजा सुनाई है और अलग-अलग धाराओं में 13,100-13,100 रुपए का जुर्माना भी लगाया।

आपको बता दें, कि साल 2015 में व्यापमं फर्जीवाड़े का खुलासा पुलिस को भेजे गए एक पत्र से हुआ था। जिसमें किसी अज्ञात ने व्यापमं फर्जीवाड़े से जुड़ी जानकारी सबूत के साथ दी थी। इसके बाद पुलिस ने इस मामले में जांच शुरू कर दी थी। कई लोगों को गिरफ्तार भी किया था।

साल 2009 में आयोजित प्री पीजी परीक्षा में डॉक्टर आशुतोष गुप्ता की जगह पर सॉल्वर ने परीक्षा दी थी और सॉल्वर का प्रबंध डॉक्टर पंकज गुप्ता के माध्यम से कराया गया था।

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   जानें पूरा मामला

साल 2013 में मध्य प्रदेश में व्यापमं घोटाले का खुलासा हुआ था। व्यापमं परीक्षाओं में अभ्यर्थियों की जगह किसी दूसरे को बिठाना, नकल कराना और अन्य तरह की धांधलियां सामने आईं थी। जांच के बाद इस मामले में अब तक 125 से ज्यादा लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है।

मामले में जब जांच शुरू हुई तो जांचकर्ता और आरोपियों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत होने लगी। इस व्यापमं घोटाले के तार मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ के अलावा उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, झारखंड, आंध्र प्रदेश, राजस्थान समेत कई राज्यों से जुड़े होने की बात सामने आई। जब मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा तो इस मामले की जांच केंद्रीय जांच एजेंसी (CBI) को सौंप दी गई।

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