अदालत द्वारा दोषी ठहराये जाने से पहले, उसी दिन विधायक द्वारा किया गया मतदान अवैध नहीं: न्यायालय

नयी दिल्ली, 18 दिसंबर (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को एक महत्वपूर्ण व्यवस्था दी कि आपराधिक मामले में दोषी ठहराये जाने से ठीक पहले, उसी दिन विधि निर्माता (सांसद-विधायक) द्वारा किये गये मतदान को अवैध नहीं ठहराया जा सकता। न्यायालय ने कहा कि दोषसिद्धि से पहले ही उसे अयोग्य बताना दोषी ठहराये जाने तक निर्दोष मानने के उसके अधिकार का घोर उल्लंघन होगा।

शीर्ष अदालत ने इसे ‘दिलचस्प लेकिन दूरगामी परिणाम वाला सवाल बताया’ और कहा कि अदालत द्वारा आरोपी को अपराह्न ढाई बजे दोषी ठहराया जाता है लेकिन उसे डेढ़ घंटा पहले, एक बजे से ही दोषी मानना अपराध न्याय शास्त्र के, निर्दोष मानने के बुनियादी सिद्धांत पर कुठाराघात होगा।

न्यायालय ने अपने 32 पृष्ठ के फैसले में इस व्यवस्था के साथ ही 2018 में झारखंड से राज्यसभा के लिये कांग्रेस नेता धीरज प्रसाद साहू के निर्वाचन को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी।

प्रधान न्यायाधीश एस ए बोबडे, न्यायमूर्ति ए एस बोपन्ना और न्यायमूर्ति वी रामासुब्रमणियन की पीठ ने कहा कि झारखंड मुक्ति मोर्चा के अमित कुमार महतो के मतदान को वैध करार दिया। महतो ने 2018 के राज्यसभा चुनाव में 23 मार्च को अपराह्न ढाई बजे दोषी ठहराये जाने से पहले सवेरे सवा नौ बजे मतदान किया था जिसकी वजह से भाजपा प्रत्याशित प्रदीप कुमार संथालिया पराजित हो गये।

पीठ ने अपने फैसले में कहा, ‘‘पहले बिन्दु पर हम यह व्यवस्था देते हैं कि अमित कुमार महतो ने 23 मार्च, 2018 को सवेरे सवा नौ बजे मतदान किया जिसे सही वैध माना गया। इससे इतर मानने का परिणाम यह होगा कि या तो चुनाव अधिकारी को अपराह्न में आने वाले अदालत के नतीजे का पूर्वानुमान था अथवा निर्वाचन आयोग को कार्रवाई करने का अधिकार देने से अंतहीन भ्रम और अव्यवस्था जन्म लेगी।’’

पीठ ने कहा कि जन प्रतिनिधित्व कानून के तहत अयोग्यता दोषसिद्धि के बाद शुरू होती है और घटना से पहले उसके परिणाम नहीं हो सकते हैं।

पीठ ने कहा, ‘‘हमारी राय में विधानसभा के सदस्य को दोषी ठहराये जाने से पहले ही अयोग्य बताना, उसके दोषी सिद्ध होने से पहले तक निर्दोष माने जाने के कानूनी अधिकार का घोर हनन होगा।’’

झारखंड से राज्यसभा की दो सीटों के लिये निर्वाचन आयोग ने फरवरी, 2018 में अधिसूचना जारी की थी और 12 मार्च को संथालिया ने भाजपा प्रत्याशी के रूप में नामांकन पत्र दाखिल किया था। संथालिया के अलावा भाजपा के समीर ओरांव ओर कांग्रेस के धीरज प्रसाद साहू ने भी नामांकन दायर किये थे।

पीठ ने अपने फैसले में कहा कि राज्यसभा चुनाव में विधायक अमित कुमार महतो, जिन्हें निचली अदालत ने मतदान वाले दिन 23 मार्च, 2018 को दोषी ठहराया था, का मतदान वैध था। न्यायालय ने कहा कि महतो ने निचली अदालत द्वारा फैसला सुनाये जाने से पहले चुनाव में मत डाला था।

उच्च न्यायालय ने इसी साल 17 जनवरी को प्रदीप कुमार संथालिया की चुनाव याचिका खारिज कर दी थी। उच्च न्यायालय ने कहा था कि भाजपा प्रत्याशी ने न तो पुन: मतगणना का अनुरोध किया था और न ही मामले में निर्वाचन आयोग को पक्षकार बनाया था।

भाजपा नेता ने अपनी अपील में कहा था कि महतो को 23 मार्च 2018 को निचली अदालत ने एक आपराधिक मामले में दोषी ठहराया था और उसी दिन अपराह्न में उन्हें दो साल कैद की सजा सुनाई थी।

अपील में कहा गया कि राज्यसभा चुनाव के नतीजे आने से पहले संथालिया ने लिखित में आपत्ति दर्ज करायी थी कि महतो को दोषी ठहराकर दो साल की सजा सुनाई गयी है, अत: इनका मत अवैध घोषित किया जाये।

याचिका में कहा गया कि चुनाव अधिकारी ने समीर ओरांव और धीरज प्रसाद साहू को झारखंड से राज्यसभा के लिये निर्वाचित घोषित कर दिया था। उनका कहना था कि चुनाव अधिकारी ने महतो के मत की वैधता को लेकर उनकी आपत्ति अस्वीकार कर दी थी।

भाषा अनूप

अनूप उमा मनीषा

मनीषा

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