Vishwakarma puja 2020: जानें कौन हैं भगवान विश्वकर्मा, क्यों माने जाते हैं शिल्पकारों और रचनाकारों के ईष्ट देव

भोपाल: देशभर के कई हिस्सों में आज यानी बुधवार 16 सितंबर को विश्वकर्मा पूजा की जा रही है। आज के दिन विधिपूर्वक भगवान विश्वकर्मा की पूजा की जाती है और बिजनेस और रोजगार की तरक्की के लिए भगवान विश्वकर्मा से प्रार्थना की जाती है। वहीं धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान विश्वकर्मा को देवताओं का शिल्पी कहा जाता है। वे संसार के पहले इंजीनियर और वास्तुकार भी कहे जाते हैं और निर्माण एवं सृजन के देवता भी।

जानें पूजा का शुभ मुहूर्त

चतुर्दशी तिथि आरंभ (15 सितंबर)- 11 बजकर 1 मिनट से चतुर्दशी तिथि समाप्त (16 सितंबर)- 7 बजकर 56 मिनट तक पूजा का शुभ मुहूर्त- 16 सितंबर- सुबह 10 बजकर 9 मिनट से 11 बजकर 37 मिनट तक

कैसे करें विश्वकर्मा पूजा

विश्वकर्मा पूजा वाले दिन सुबह जलदी उठकर स्नान करें और पूजा की तैयारी कर भगवान विश्वकर्मा की फोटो या मूर्ति स्थापिक करें। इसके बाद पीले या फिर सफेद फूलों की माला भगवान को चढ़ाएं। इसके बाद उनके सामने सुगंधित धूप और दीपक भी जलाएं। आखिरी में अपने सभी औजारों की एक-एक करके पूजा करें। भगवान विश्वकर्मा को पंचमेवा प्रसाद का भोग लगाएं। इसके बाद हाथ में फूल और अक्षत लेकर विश्वकर्मा भगवान का ध्यान करें और उनसे अपने व्यापार की तरक्की की कामना करें।

कौन हैं भगवान विश्वकर्मा

भगवान विश्वकर्मा वास्तुदेव तथा माता अंगिरसी की संतानहैं। भगवान विश्वकर्मा शिल्पकारों और रचनाकारों के ईष्ट देव हैं। उन्होंने सृष्टि की रचना में ब्रह्मा जी की मदद की तथा पूरे संसार का मानचित्र बनाया था। भगवान विश्वकर्मा ने स्वर्ग लोक, श्रीकृष्ण की नगरी द्वारिका, सोने की लंका, पुरी मंदिर के लिए भगवान जगन्नाथ, बलभद्र एवं सुभद्रा की मूर्तियों, इंद्र के अस्त्र वज्र आदि का निर्माण किया था। ऋगवेद में उनके महत्व का पूर्ण वर्णन मिलता है।

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