वृंदावन की पावन धरा पर अक्सर ऐसे संवाद होते हैं जो जीवन की दिशा बदल देते हैं। हाल ही में एक सत्संग के दौरान, एक जिज्ञासु भक्त ने प्रेमानंद महाराज जी से एक ऐसा सवाल पूछ लिया, जो सुनने में तो बेहद साधारण था, लेकिन उसका अर्थ ब्रह्मांड जितना गहरा था। भक्त ने हाथ जोड़कर पूछा—'महाराज जी, आप आखिर हैं कौन?' यह सुनते ही वहां सन्नाटा पसर गया। हर कोई सांस थामे इंतजार कर रहा था कि महाराज जी क्या कहेंगे? क्या वे अपने अतीत के बारे में बताएंगे? या अपनी सिद्धियों का बखान करेंगे? सबकी निगाहें उनके चेहरे पर टिकी थीं।"
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