एक भक्त ने प्रेमानंद महाराज से पूछा कि क्या वे इतने प्रश्नों से थकते नहीं। महाराज ने कहा—भक्तों के प्रश्न ही उन्हें ऊर्जा देते हैं। यदि उनके शब्दों से किसी एक का भी जीवन सुधर जाए तो वही उनकी वाणी की सफलता और परम आनंद है।
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