संत प्रेमानंद महाराज ने बताया कि मनुष्य की अशांति का असली कारण ‘चाह’ यानी इच्छाएँ हैं। जब तक मन में चाह बनी रहती है, शांति दूर रहती है। महाराज जी कहते हैं कि इच्छाओं से मुक्ति ही सच्ची शांति और जीवन में स्थिरता ला सकती है।
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