13 जनवरी 1948, ये महात्मा गांधी के जीवन का सबसे कठिन दिन था। दिल्ली दंगों की आग में जल रही थी और भाईचारा खत्म हो रहा था। तब बापू ने सत्य और अहिंसा का अपना आखिरी हथियार निकाला..'आमरण अनशन'। उनका संकल्प था कि जब तक दिल्ली में शांति नहीं होगी, वे अन्न की एक बूंद नहीं लेंगे। इस अनशन का बड़ा कारण पाकिस्तान को दिए जाने वाले 55 करोड़ रुपये भी थे, जिसे बापू ने भारत की नैतिक जिम्मेदारी माना। 78 साल की उम्र में उनके इस अडिग फैसले ने देश को झकझोर दिया और अंततः नफरत हार गई। ये बापू का मानवता के लिए आखिरी बलिदान था।
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