महज 13 साल की उम्र में सुंदरलाल बहुगुणा के मन में कुछ अलग करने की ऐसी धुन सवार हुई कि वह अमर शहीद श्रीदेव सुमन के संपर्क में आ गए। इसके बाद उन्होंने टिहरी रियासत के खिलाफ बगावत से लेकर शराबंदी, 'चिपको' आंदोलन, टिहरी बांध विरोधी आंदोलन सहित कई अन्य आंदोलनों की अगुआई की और पर्यावरण संरक्षण के लिए बेमिसाल काम किया। प्रसिद्ध पर्यावरणविद सुंदरलाल बहुगुणा का जन्म नौ जनवरी सन् 1927 में हुआ। 1974 में बहुगुणा प्रसिद्ध 'चिपको' आंदोलन का हिस्सा बने और हरे पेड़ों को कटने से बचाया। सन् 1981 में केंद्र सरकार ने उन्हें पद्मश्री देने की घोषणा की।
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