अमेरिका के शिकागो में 1893 में हुए विश्व धर्म महासभा में स्वामी विवेकानंद का एक भाषण आज भी इतिहास में याद किया जाता है, जब उनके विचारों और शब्दों ने वहां मौजूद लोगों के दिलों को छू लिया और तालियों की गूंज से उनका स्वागत किया गया। भाषण देते हुए अपने संबोधन की शुरुआत "अमेरिका के भाइयों और बहनों" से की। ये भाषण न केवल भारतीय धर्म और संस्कृति का परिचय था, बल्कि पूरे विश्व के लिए एक संदेश भी था। उन्होंने भारत की प्राचीन वैदिक परंपरा, योग और ध्यान की शक्ति को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत किया था। आप को बता दें धर्म और आध्यात्म के महानायक स्वामी विवेकानंद की जयंती हर साल 12 जनवरी को मनाई जाती है।
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