बर्ड फ्लू के मद्देनजर सतर्कता बढ़ी : मृत पक्षियों की सूचना देने के लिए नियंत्रण कक्ष की स्थापना

लखनऊ, 11 जनवरी (भाषा) उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर और बलिया जिलों में विभिन्न प्रजातियों के पक्षियों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत की ताजा घटनाएं सामने आई हैं। राज्य में इस फ्लू की रोकथाम के लिए सतर्कता बढ़ा दी गई है। साथ ही पशुपालन निदेशालय में एक नियंत्रण कक्ष भी स्थापित किया गया है।

कानपुर चिड़ियाघर में मरे कुछ पक्षियों में बर्ड फ्लू पाए जाने के बाद लखनऊ प्राणी उद्यान प्रशासन ने अपने यहां पक्षियों के बाड़े को दर्शकों के लिए बंद कर दिया है और पक्षियों के आदान-प्रदान कार्यक्रम को भी अस्थाई तौर पर निलंबित कर दिया है।

उधर, बर्ड फ्लू के मद्देनजर बरेली में भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई) में सोमवार से पक्षियों के नमूनों की जांच युद्ध स्तर पर शुरू कर दी गई है।

बर्ड फ्लू से उत्पन्न होने वाली स्थिति से निपटने के लिए प्रदेश के मुख्य सचिव राजेन्द्र कुमार तिवारी की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय टास्क फोर्स की वर्चुअल बैठक आयोजित की गयी।

सरकार द्वारा जारी एक बयान के मुताबिक तिवारी ने कहा कि लोगों को बर्ड-फ्लू के बारे में जागरूक किया जाए। उन्होंने समस्त सम्बन्धित विभागों से उनके द्वारा की जा रही तैयारियों के सम्बन्ध में जानकारी प्राप्त कर निर्देश दिये कि उनके स्तर से इस बीमारी से बचाव के लिए सुरक्षात्मक कदम तत्काल उठाये जाएं।

उन्होंने कहा कि मृत पक्षियों की सूचना आमजन द्वारा आपातकालीन नम्बर तथा मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर दी जा सकती है। पशुपालन निदेशालय में कन्ट्रोल रूम की स्थापना की गयी है जो कि 24 घन्टे क्रियाशील है। जिलों में स्थापित कोविड कन्ट्रोल रूम पर तत्काल कर्मचारियों की ड्यूटी नियत कर रिपोर्ट प्राप्त की जाए।

मुख्य सचिव ने यह भी कहा कि आमजन को यह जानकारी प्रदान की जाए कि पूर्णरूप से पका हुआ अण्डा या मीट खाने से बर्ड-फ्लू का कोई खतरा नहीं है क्योंकि यह वायरस 70 डिग्री सेन्टीग्रेट पर समाप्त हो जाता है।

इस बीच, लखनऊ स्थित नवाब वाजिद अली शाह प्राणी उद्यान के निदेशक आरके सिंह ने बताया कि लखनऊ चिड़ियाघर में पक्षियों के बाड़े को रविवार से दर्शकों के लिए बंद कर दिया गया है साथ ही पक्षियों के आदान-प्रदान का नियमित रूप से किया जाने वाला कार्यक्रम भी अस्थाई तौर पर रोक दिया गया है

उन्होंने बताया कि चिड़ियाघर में रखे गए पक्षियों के भोजन में विटामिन के तत्व बढ़ा दिए गए हैं और उन्हें खिलाया जाने वाला चिकन और अंडे का आहार भी देना बंद कर दिया गया है। चिड़ियाघर में काम करने वाले सभी से कहा गया है कि वे किसी भी पक्षी में असामान्य स्थिति पाए जाने पर फौरन इसकी सूचना दें तथा ऐसे पक्षियों को फौरन आइसोलेशन वार्ड में रखा जाए।

उधर, शाहजहांपुर जिले के कलान कस्बे में तीन बत्तखों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई।

पशुपालन विभाग के अपर निदेशक डॉक्टर जीवन दत्त ने बताया कि मामला उनके संज्ञान में आज आया है। तालाब में रहने वाली अन्य बत्तखों के नमूने लिए जा रहे हैं और बरेली स्थित आईवीआरआई में जांच के बाद ही पता चल सकेगा कि बत्तखों की मौत कैसे हुई।

इस बीच में बलिया से मिली खबर के मुताबिक सहतवार थाना क्षेत्र में रविवार रात पांच कौवे संदिग्ध परिस्थितियों में मरे पाए गए।

जिला मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर अशोक मिश्र ने बताया कि सहतवार थाना क्षेत्र में कल रात पाँच कौवे मृत मिले। वन विभाग ने सभी को अपने कब्जे में ले लिया है। उनके नमूने परीक्षण के लिए भोपाल भेजे जा रहे हैं।

उधर, बरेली से प्राप्त रिपोर्ट के मुताबिक आईवीआरआई में पक्षियों के सैंपल की जांच सोमवार से युद्ध स्तर पर शुरू कर दी गयी है। एक दिन में लगभग 1200 सैंपल की जाँच का अनुमान है।

आईवीआरआई के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉक्टर वी. के. गुप्ता ने बताया कि वैसे तो संस्थान पूरे साल बर्ड फ्लू की जांच करता है लेकिन अब इस फ्लू के संक्रमण का खतरा बढ़ने के बाद उत्तर प्रदेश के साथ-साथ उत्तराखंड के विभिन्न इलाकों से लगातार पक्षियों के सैंपल जांच के लिए आ रहे हैं। अभी तक की जाँच में बर्ड फ्लू संक्रमण का एक भी मामला सामने नहीं आया है।

बरेली में ही स्थित केंद्रीय पक्षी अनुसंधान संस्थान (सीएआरआई) के निदेशक डॉक्टर संजीव कुमार ने बताया कि कानपुर में बर्ड फ्लू का मामला सामने आने से सीएआरआई प्रशासन की चिंता बढ़ गई है। पक्षियों की आवाजाही के लिहाज से कानपुर काफी नजदीक है, इसलिए सीएआरआई में अभेद्य जैविक सुरक्षा का कवच तैयार किया गया है।

बरेली के मुख्य वन संरक्षक ललित वर्मा ने बताया कि ऐसे जलाशयों में निगरानी बढ़ा दी गई है जहां प्रवासी पक्षी बहुतायत में आते हैं। जलाशयों के पास मरे पक्षियों की जांच कराने और लोगों को उनसे दूर रखने के प्रयास किए जा रहे हैं। बर्ड फ्लू का संक्रमण फैलने का खतरा बना हुआ है अत: सभी रेंजरों को निर्देश दिए गए हैं कि पक्षियों और उनकी मृत्यु के संबंध में आंकड़े एकत्र किए जाएं।

पीलीभीत के उप मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी राजीव मिश्रा ने बताया कि मुर्गे -मुर्गियों के मरने की सूचना मिली थी। उनकी मौत प्रथम दृष्टया जहर खाने से होने का संकेत मिला है। जो मुर्गे-मुर्गियां मरी हैं वह बाड़े के बाहर थीं। जांच के लिए दो मुर्गियों के नमूने जांच के लिए भेजे गए हैं।

भाषा सं सलीम जफर प्रशांत मानसी

मानसी

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