देश में जल्द सीवेज के पानी और ठोस कचरे से दौड़ेंगे वाहन! जानिए क्या है ग्रीन हाइड्रोजन फ्यूल?

देश में जल्द सीवेज के पानी और ठोस कचरे से दौड़ेंगे वाहन! जानिए क्या है ग्रीन हाइड्रोजन फ्यूल? Vehicles will soon run on sewage water and solid waste in the country! Know what is Green Hydrogen Fuel? nkp

देश में जल्द सीवेज के पानी और ठोस कचरे से दौड़ेंगे वाहन! जानिए क्या है ग्रीन हाइड्रोजन फ्यूल?

नई दिल्ली। जल्द ही आपको देश की सड़कों पर ग्रीन हाइड्रोजन फ्यूल से चलने वाली गाड़ियां दिखाई देंगी। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी (Nitin Gadkari) ने कहा कि सरकार तेजी से ग्रीन हाइड्रोजन (Green Hydrogen) के उपयोग को बढ़ावा देने की योजना पर काम कर रही है। गडकरी ने कहा कि इस फ्यूल में हम कचरे का भी इस्तेमाल करेंगे। आइए जानते हैं क्या है ग्रीन हाइड्रोजन फ्यूल?

ग्रीन हाइड्रोजन फ्यूल?

ग्रीन हाइड्रोजन फ्यूल भी एक प्रकार से हाइड्रोजन इंधन ही है। इसे बिना जीवाश्म के बजाय नवीनीकरण उर्जा का उपयोग करके बनाया जाता है। यह एक शक्तिशाली फ्यूल है। इससे भारी से भारी वाहनों और मशीनों को चलाया जा सकता है। इंधन की खास बात यब है कि इससे शून्य उत्सर्जन होता है। ग्रीन हाईड्रोजन इंधन को पानी से तैयार किया जाता है।

कई देश इस इंधन पर काम कर रहे हैं

अगर इसके उपयोग की बात करें तो ग्रीन हाइड्रोजन को हम कई कामों में इस्तेमाल कर सकते हैं। जैसे कि इसे हम प्राकृतिक गैस में जोड़ सकते हैं। इससे हम थर्मल पावर या जिला ताप संयंत्रों को चला सकते हैं। इसके अलावा अन्य ऊर्जा वाहकों के लिए एख अग्रदूत के रूप में भई हम इसका उपयोग कर सकते हैं। दुनिया के कई देश इस वक्त ग्रीन हाइड्रोजन पर काम कर रहे हैं। हालांकि वर्तमान समय में ग्रीन हाइड्रोजन का उत्पादन ना के बराबर किया जाता है। लेकिन आने वाले समय में ग्रीन हाइड्रोजन ही भविष्य है।

सीवेज के पानी और सॉलिड कचरे का होगा इस्तेमाल

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि वे जल्द ही दिल्ली की सड़कों पर एक ग्रीन हाइड्रोजन प्यूल से चलने वाली कार चलाने वाले है। इसके लिए हम सीवेज के पानी और सॉलिड कचरे का इस्तेमाल करेंगे। क्योंकि कचरे और सीवेज के पानी से निकाले गए हाइड्रोजन से वाहन चल सकते हैं।

ग्रीन हाइड्रोजन से नुकसान

ग्रीन हाइड्रोजन की पहली परेशानी सुरक्षा की है। ये अत्यधिक ज्वलनशील होने की वजह से हाइड्रोजन अत्यधिक खतरनाक है। इससे चलने वाली किसी भी वाहन को सुरक्षित नहीं माना जा सकता है। ज्वलनशीलता और बहुत कम तापमान पर रखे जाने की मजबूरी के चलते इसकी सेफ सप्लाई और भंडारन कड़ी चुनौती है।वहीं, उत्पादन लागत का सवाल भी है।

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