घर के मुख्य द्वार पर डोर मेट: वास्तु टिप्स से जानें क्या है सही और क्या है गलत

जानें वास्तु शास्त्र के अनुसार घर के मुख्य द्वार पर डोर मेट कैसा होना चाहिए। डोर मेट का रंग, आकार, सामग्री, और सही स्थान की पूरी जानकारी

घर के मुख्य द्वार पर डोर मेट: वास्तु टिप्स से जानें क्या है सही और क्या है गलत

घर का मुख्य द्वार वह स्थान होता है जहां से सुख, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा प्रवेश करती है। इसलिए, वास्तु शास्त्र के अनुसार मुख्य द्वार पर डोर मेट का चयन करना बेहद महत्वपूर्ण होता है। आइए जानते हैं ज्योतिषाचार्य पंडित अनिल पाण्डेय (8959594400) से, कि वास्तु के अनुसार डोर मेट का रंग, आकार, सामग्री और स्थान कैसा होना चाहिए, ताकि घर में धन और सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बना रहे।


वास्तु अनुसार डोर मेट का रंग कैसा होना चाहिए?

डोर मेट का रंग मुख्य द्वार की दिशा के अनुसार चुना जाना चाहिए। दिशा के अनुसार उपयुक्त रंगों का चयन करने से सकारात्मक ऊर्जा घर में प्रवेश करती है।

  1. उत्तर या पूर्व दिशा:
    हल्के नीले, हरे या सफेद रंग के डोर मेट शुभ माने जाते हैं। ये रंग शांति और सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ावा देते हैं।
  2. दक्षिण दिशा:
    लाल, गुलाबी या नारंगी रंग का डोर मेट उपयुक्त होता है। ये रंग ऊर्जा और उत्साह को बढ़ाते हैं।
  3. पश्चिम दिशा:
    भूरे, सिल्वर या ग्रे रंग का डोर मेट शुभ माना जाता है। ये रंग स्थिरता और संतुलन का प्रतीक हैं।
  4. सकारात्मकता और समृद्धि के लिए:
    हल्के रंग जैसे सफेद, पीला या हल्का नीला सकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करते हैं, जबकि गहरे रंग सुरक्षा और स्थिरता की भावना देते हैं।

वास्तु अनुसार डोर मेट का आकार और आकृति

  1. आकार:
    डोर मेट का आकार मुख्य द्वार की चौड़ाई के अनुपात में होना चाहिए। यह न तो बहुत बड़ा हो और न ही बहुत छोटा। सामान्यतः द्वार की चौड़ाई के कम से कम 80% तक का डोर मेट उपयुक्त माना जाता है। यह द्वार के समांतर होना चाहिए ताकि दरवाजा खुलने पर यह रास्ते में न आए।
  2. आकृति:
    आयताकार या अंडाकार आकार के डोर मेट सबसे अधिक लोकप्रिय और शुभ माने जाते हैं। ये आकृतियां द्वार के सामने आकर्षक और संतुलित दिखती हैं।

वास्तु अनुसार डोर मेट की सामग्री

  1. प्राकृतिक फाइबर:
    नारियल के रेशों या जूट से बने डोर मेट सबसे अधिक उपयुक्त माने जाते हैं। ये प्राकृतिक सामग्री सकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करती हैं।
  2. रबर या कोयर:
    रबर और कोयर से बने डोर मेट भी अच्छे माने जाते हैं। ये पर्यावरण के अनुकूल होते हैं और लंबे समय तक चलते हैं।
  3. लकड़ी:
    लकड़ी से बने डोर मेट पृथ्वी तत्व का प्रतिनिधित्व करते हैं और स्थिरता प्रदान करते हैं।

वास्तु अनुसार डोर मेट का डिज़ाइन

  1. सरल और साफ डिज़ाइन:
    डोर मेट का डिज़ाइन सरल और साफ होना चाहिए। जटिल या नकारात्मक चिह्नों वाले डिज़ाइन से बचें।
  2. स्वागत संदेश:
    "वेलकम" या "स्वागतम्" जैसे स्वागत संदेश वाले डोर मेट शुभ माने जाते हैं। ये आने वाले मेहमानों के लिए सकारात्मकता और आतिथ्य का संकेत देते हैं।
  3. प्राकृतिक दृश्य:
    फूल, पत्ते, सूरज या पेड़ों की डिज़ाइन वाले डोर मेट सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ावा देते हैं।

वास्तु अनुसार डोर मेट कहां रखना चाहिए?

  1. मुख्य द्वार पर:
    मुख्य द्वार पर डोर मेट लगाना सबसे आम और जरूरी है। यह बाहर से आने वाली गंदगी और नकारात्मक ऊर्जा को घर में प्रवेश करने से रोकता है।
  2. बैक डोर पर:
    यदि घर में बैक डोर है, तो वहां भी डोर मेट लगाना उचित है, खासकर यदि यह गार्डन या बाहरी क्षेत्र से जुड़ता हो।
  3. बाथरूम के बाहर:
    बाथरूम के दरवाजे के बाहर डोर मेट रखने से गीले पैरों से फर्श पर पानी फैलने से रोका जा सकता है।
  4. किचन के प्रवेश द्वार पर:
    किचन में सफाई बनाए रखने के लिए, उसके प्रवेश द्वार पर डोर मेट लगाना चाहिए।

डोर मेट की साफ-सफाई और रखरखाव

  • डोर मेट को नियमित रूप से साफ करना चाहिए ताकि गंदगी और नकारात्मक ऊर्जा जमा न हो।
  • टूट-फूट होने पर डोर मेट को तुरंत बदल देना चाहिए।
  • डोर मेट का रंग ऐसा हो जो गंदगी को आसानी से न दिखाए और साफ-सफाई में आसानी हो।

निष्कर्ष

वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर के मुख्य द्वार पर डोर मेट का सही चयन करने से सकारात्मक ऊर्जा, समृद्धि और सुख-शांति घर में प्रवेश करती है। डोर मेट का रंग, आकार, सामग्री और स्थान सही होने पर यह न केवल घर की सुंदरता बढ़ाता है, बल्कि वास्तु दोषों को भी दूर करता है। इसलिए, डोर मेट चुनते समय वास्तु के इन नियमों का ध्यान जरूर रखें।

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