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Rangbhari Ekadashi 2026: आज 27 फरवरी को रंगभरी एकादशी है।काशी विश्वनाथ धाम में रंग भरी एकादशी के बाद काशी में होलीयाना माहौल शुरू हो जाता है। रंगो के इस त्यौहार की शुरुआत रंग भरी एकादशी से होकर बुढ़वा मंगल तक चलता है। रंगभरी एकादशी से काशी में अलग-अलग दिनों में अलग-अलग प्रकार की होलियां खेली जाती है। शिव की काशी में मां पार्वती का गौना होने की खुशी में एक दूसरे को रंग लगाते हैं तो कहीं चिता-भष्म की होली होती है, तो कहीं फूलों की होली होती है, लेकिन काशी में इस बार एक विशेष होली का आयोजन इस्कॉन टेंपल की ओर से किया जा रहा है जो अपने आप में विशेष होने वाला है।
कृष्ण खेलेंगे 1100 किलो फूलों से होली
सांस्कृतिक और आध्यात्मिक परंपरा को जीवंत रूप देते हुए एक विशेष वैदिक संस्कृत उत्सव फूलों की होली का आयोजन शिव की काशी में किया जा रहा है। यह आयोजन रंगभरी एकादशी के बाद आगामी 28 फरवरी को होगा। इस खास आयोजन के अतिथि भगवान लड्डू गोपाल यानि भगवान कृष्ण होंगे। भगवान कृष्ण 1100 किलो से ज्यादा फूलों की होली खेलेंगे। यह विशेष इसलिए भी है क्योंकि भगवान कृष्ण और भक्त एक साथ रंग-बिरंगे फूलों के रंगों में सराबोर होते दिखाई देंगे।
30 से ज्यादा रंगो के फूल होंगे
फागुन का महीना यानी प्रकृति में बदलाव का भी महीना होता है फागुन के महीने में पेड़ों से पत्तियां गिरने के बाद रंग-बिरंगे फूलों से प्रकृति का वातावरण रंगोत्सव के रंग में रंगा हुआ नजर आ रहा है। ऐसे में इस्कॉन टेंपल की ओर से काशी में प्राकृतिक होली के लिए 1100 किलो फूलों का इस्तेमाल किया जाएगा इसमें 30 से ज्यादा रंगों के फूलों से भगवान कृष्ण अपने भक्तों के साथ खेलते हुए नजर आएंगे।
वृंदावन के रंग में रंगी हुई नजर आएगी काशी
काशी की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक परंपरा को जीवंत होता दुनिया समय-समय पर देखती रहती है। ऐसे ही धार्मिक मौकों पर काशी अलग-अलग शहरों में तब्दील होती हुई नजर आती रहती है। ऐसा ही एक मौका एक बार फिर काशीवासियों के सामने आ रहा है जिसमें भगवान शिव की नगरी काशी पर कृष्ण-कन्हैया की नगरी वृंदावन का रंग चढ़ता हुआ नजर आएगा। बता दें कि लड्डू गोपाल के नगर वृंदावन में होला अष्टक के दिन लट्ठमार की होली हो चुकी है।
रंगभरी एकादशी पर बाबा के साथ रंगोत्सव के बाद शुरू होती है होली
काशी में समय-समय पर तमाम तरह के धार्मिक आयोजन होते रहते हैं, लेकिन रंगभरी एकादशी का इंतजार काशी ही नहीं बल्कि विश्व के कोने-कोने में रहने वाले सनातनियों को बेसब्री से रहता है। रंगभरी एकादशी वही दिन होता है, जिसमें भक्त अपने आराध्य महादेव को रंग लगाने के बाद ही होली खेलते हैं और इसके बाद काशी में फिर रंगों की शुरुआत हो जाती है।
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