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Pilibhit Property Dealer Office Death: उत्तर प्रदेश में पीलीभीत के एक रसूखदार प्रॉपर्टी डीलर के कार्यालय में कर्मचारी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के बाद मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। घटना के 30 घंटे बाद भी एफआईआर दर्ज नहीं होने से परिजन आक्रोशित हैं। इसी बीच जब वह पीडब्ल्यूडी गेस्ट हाउस पहुंचे तो घटनाक्रम ने सियासी रंग ले लिया।
मामला बढ़ता देख राज्य मंत्री संजय सिंह गंगवार( Sanjay Singh Gangwar) ने सख्त रुख अपनाते हुए पुलिस अधीक्षक को मौके पर तलब कर शहर कोतवाल को सस्पेंड करने के निर्देश दिया। हालांकि खबर लिखे जाने तक निलंबन की कार्रवाई नहीं हुई थी।
क्या है मामला
जानकारी के अनुसार, मृतक अनिल शहर के कथित बड़े कॉलोनाइजर वेद प्रकाश कश्यप के ऑफिस में कर्मचारी था। उसका शव कार्यालय के अंदर फांसी के फंदे से लटका मिला। परिजनों का आरोप है कि यह आत्महत्या नहीं, हत्या है और इसमें प्रॉपर्टी डीलर की भूमिका संदिग्ध है।
परिवार का कहना है कि तहरीर देने के बावजूद पुलिस ने 30 घंटे तक मुकदमा दर्ज नहीं किया। आरोप है कि प्रभावशाली व्यक्ति के दबाव में कार्रवाई टाली जाती रही।
गेस्ट हाउस में तीखी नोकझोंक
पीड़ित परिवार की गुहार पर मंत्री ने जब शहर कोतवाल से जवाब मांगा तो उन्होंने पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही एफआईआर दर्ज करने की बात कही। इस पर मंत्री ने कड़ी नाराजगी जताई। मंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि प्रदेश सरकार पीड़ितों के साथ है और किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने एसपी Sukirti Madhav Mishra को बुलाकर कोतवाल की कार्यशैली पर सवाल उठाए और निलंबन के निर्देश दिए।
सवालों के घेरे में पुलिस
सबसे बड़ा सवाल तो यह है कि आखिर 30 घंटे तक एफआईआर दर्ज क्यों नहीं हुई? क्या पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार कानूनी मजबूरी थी या फिर कार्रवाई टालने का बहाना?।मंत्री के निर्देश के बाद पुलिस महकमे में हलचल तेज है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या कोतवाल पर निलंबन की गाज गिरती है,। प्रकरण में निष्पक्ष जांच होती है या नहीं।
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