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Lucknow BJP Leaders Resign: प्रदेश की राजधानी लखनऊ में भारतीय जनती पार्टी को बड़े झटके लगने की खबर सामने आई है। लखनऊ के बक्शी तालाब क्षेत्र के कुम्हारावां मंडल के महामंत्री आलोक तिवारी ने यूजीसी कानून (UGC) के विरोध में अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। आलोक तिवारी (Alok Tiwari resignation ) ने अपने पद से इस्तीफे देने की वजह में बताया कि यूजीसी कानून सवर्ण समाज के बच्चों के भविष्य के लिए खतरा है।
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यूजीसी कानून को लेकर बढ़ा असंतोष
बख्शी तालाब विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत कुम्हरावां मंडल के महामंत्री आलोक तिवारी ने पार्टी नेतृत्व को पत्र लिखते हुए अपने पद से इस्तीफा देने की घोषणा की। आलोक तिवारी ने पत्र में लिखा कि बीजेपी की स्थापना जिन मूल विचारों और उद्देश्यों के साथ पंडित दीन दयाल उपाध्याय और श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने की थी, पार्टी आज उनसे भटकती नजर आ रही है। UGC law controversy
आलोक तिवारी का कहना है कि पार्टी के शीर्ष पदाधिकारियों द्वारा यूजीसी कानून लागू किया गया है, जो सवर्म समाद के बच्चों के भविष्य के साथ अन्याय है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस कानून के जरिए समाज के एक वर्ग के भविष्य से खिलवाड़ किया जा रहा है, जिसे वह स्वीकार नही कर सकते।
पार्टी कार्यक्रमों से दूरी का ऐलान
इस्तीफे में आलोक तिवारी ने स्पष्ट किया कि वह अब पार्टी के किसी भी कार्यक्रम में शामिल नहीं होंगे। उन्होंने जिला अध्यक्ष, लखनऊ को संबोधित करते हुए कहा कि नैतिक आधार पर वह अपने पद पर बने नहीं रह सकते हैं। उनके अनुसार, जब पार्टी की नीतियां समाज के एक बड़े वर्ग को प्रभावित कर रही हों, तब पद पर बने रहना उनके लिए संभव नहीं है।
सामूहिक इस्तीफे से बढ़ी हलचल
इस इस्तीफे के साथ ही पार्टी संगठन में हलचल और तेज हो गई है, क्योंकि आलोक तिवारी के साथ कुम्हरावां मंडल के कई अन्य पदाधिकारियों ने भी सामूहिक रूप से इस्तीफा देने का निर्णय लिया है। इस्तीफा देने वालों में मंडल उपाध्यक्ष आलोक सिंह, मंडल मंत्री महावीर सिंह, शक्ति केंद्र संयोजक मोहित मिश्रा, नेतृ प्रकाश सिंह और नीरज पाण्डेय शामिल हैं। इसके अलावा युवा मोर्चा मंडल अध्यक्ष अनूप सिंह, युवा मोर्चा मंडल महामंत्री राज विक्रम सिंह, पूर्व मंडल मंत्री अभिषेक अवस्थी, बूथ अध्यक्ष विवेक सिंह और पूर्व सेक्टर संयोजक कमल सिंह ने भी अपने पद छोड़ दिए हैं।
स्थानीय राजनीति में असर
एक साथ इतने पदाधिकारियों के इस्तीफे को बख्शी तालाब क्षेत्र की राजनीति के लिए अहम माना जा रहा है। यूजीसी कानून को लेकर उठी यह आवाज आने वाले समय में संगठन और सरकार दोनों के लिए चुनौती बन सकती है। स्थानीय स्तर पर यह मामला तेजी से चर्चा का विषय बन गया है और पार्टी के भीतर असंतोष के संकेत भी मिलने लगे हैं।
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