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Prashant Kumar Singh Resignation Back: उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ के समर्थन में इस्तीफा देने वाले अयोध्या के GST डिप्टी कमिश्नर प्रशांत कुमार सिंह ने 4 दिन बाद अपना इस्तीफा वापस ले लिया है। उनका कहना है कि उन पर किसी तरह का दबाव नहीं है। वे फिलहाल अपने ऑफिस में काम कर रहे हैं।
फर्जी दिव्यांग सर्टिफिकेट को लेकर सफाई
प्रशांत कुमार सिंह पर उनके भाई ने नौकरी पाने के लिए फर्जी दिव्यांग सर्टिफिकेट का आरोप लगाया था। इसे लेकर उन्होंने कहा कि इस मामले में मऊ CMO से क्लीन चिट मिल गई है। वहीं मऊ CMO ने इस दावे को गलत बताया है। उन्होंने कहा कि GST डिप्टी कमिश्नर को जांच के लिए बुलाया, लेकिन वे नहीं आए।
बड़े भाई ने लगाए थे आरोप
इस्तीफा देने के बाद प्रशांत कुमार सिंह पर फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र के आधार पर सरकारी नौकरी पाने का गंभीर आरोप उनके बड़े भाई डॉ. विश्वजीत ने लगाया। विश्वजीत सिंह का दावा किया कि प्रशांत कुमार सिंह को फर्जी विकलांग सर्टिफिकेट के जरिए सरकारी नौकरी मिली है। डॉ. विश्वजीत सिंह ने 2021 में ही इसकी शिकायत दर्ज कराई थी। 20 अगस्त 2021 को उन्होंने प्रशांत कुमार सिंह के दिव्यांग प्रमाण पत्र के पुनः निरीक्षण की मांग की। इसके बाद मंडलीय चिकित्सा परिषद ने उन्हें मेडिकल बोर्ड के सामने पेश होने के लिए बुलाया, लेकिन वे 2 बार पेश नहीं हुए।
बीजेपी विधायक बनना चाहते थे प्रशांत सिंह
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GST डिप्टी कमिश्नर प्रशांत सिंह ने 2022 में कानपुर GST विभाग में असिस्टेंट कमिश्नर की पोस्ट पर रहते हुए बीजेपी से मऊ विधानसभा टिकट की दावेदारी की थी। उन्होंने बैनर-पोस्टर लगाकर अपने पक्ष में माहौल बनाने की कोशिश की थी।
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प्रशांत सिंह को नहीं मिला था टिकट
प्रशांत सिंह को बीजेपी ने टिकट नहीं दिया। इसके बाद उन्होंने नौकरी से इस्तीफा नहीं दिया। कुछ समय बाद प्रशांत सिंह प्रमोट होकर डिप्टी कमिश्नर बन गए और अयोध्या में उनकी पोस्टिंग हुई थी।
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प्रशांत सिंह ने कहा था-मुख्यमंत्री का सार्वजनिक अपमान मुझे स्वीकार नहीं
प्रशांत कुमार सिंह ने इस्तीफा देने के समय कहा कि शंकराचार्य द्वारा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ की गई टिप्पणी से वे गहराई से आहत हैं। उन्होंने कहा कि जिस प्रदेश का नमक और रोटी खाता हूं, जिस सरकार के वेतन पर मेरा परिवार चलता है, उसी प्रदेश के मुख्यमंत्री का सार्वजनिक अपमान मुझे स्वीकार नहीं। उन्होंने अपने इस्तीफे में लिखा कि संविधान में विरोध के तरीके तय हैं, लेकिन पालकी पर बैठकर मुख्यमंत्री के खिलाफ अपमानजनक भाषा का प्रयोग समाज को तोड़ने वाला काम है। ऐसे बयान जातिगत वैमनस्य फैलाते हैं, जिसका वे खुलकर विरोध करते हैं।
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