Bsp: बीएसपी में सबकुछ ठीक? मायावती ने आकाशआनंद को सभी पदों से हटाया, बोलीं-मेरे जिंदा रहने तक कोई नहीं होगा उत्तराधिकारी

Mayawati: दिल्ली के जनादेश पर बसपा सुप्रीमों उखड़ीं, कहा 'हवा चले जिधर की, चलो तुम उधर की' के तर्ज पर बनवाई सरकार

(रिपोर्ट- आलोक राय- लखनऊ)

Bsp: बहुजन समाजवादी पार्टी में सब कुछ ठीक है ! इस सवाल का जवाब बहुजन समाजवादी पार्टी की अध्यक्षा और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने आज लखनऊ में आयोजित बैठक में दे दिया है। रविवार को बसपा कार्यालय में सुप्रीमो मायावती ने बड़ा फैसला सुनाते हुए अपने काश आनंद को पार्टी के सभी पदों से हटा दिया। आकाश के ससुर अशोक सिद्धार्थ के निष्कासन के बाद उनका यह दूसरा बड़ा फैसला है।

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मायावती ने इस फैसले की घोषणा करते हुए कहा कि बसपा में सबकुछ ठीक है और पार्टी एकजुट है। हालांकि, यह फैसला पार्टी के भीतर चल रही आंतरिक कलह और गुटबाजी की आशंकाओं को बल देता है। आकाश आनंद, जो मायावती के भाई आनंद कुमार के बेटे हैं, को पिछले कुछ समय से पार्टी में अहम भूमिका निभाते देखा जा रहा था। उन्हें पार्टी का उत्तराधिकारी माना जा रहा था, लेकिन मायावती के इस फैसले ने सभी अनुमानों को गलत साबित कर दिया है।

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मायावती ने कहा, "बसपा में सबकुछ ठीक है। मैंने आकाश आनंद को पार्टी के सभी पदों से हटाने का फैसला किया है। मेरे जिंदा रहते हुए पार्टी में कोई उत्तराधिकारी नहीं होगा। पार्टी का नेतृत्व और फैसले मेरे हाथ में हैं और मैं इसका सही इस्तेमाल करूंगी।"

विश्लेषकों का मानना है कि पार्टी के भीतर गुटबाजी

इस फैसले के पीछे की वजह स्पष्ट नहीं है, लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पार्टी के भीतर गुटबाजी और आकाश आनंद की बढ़ती महत्वाकांक्षाएं इसकी वजह हो सकती हैं। मायावती ने हमेशा पार्टी पर अपना पूर्ण नियंत्रण बनाए रखा है और किसी भी तरह की गुटबाजी को बर्दाश्त नहीं किया है।

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आकाश आनंद के समर्थकों ने इस फैसले पर नाराजगी जताई

आकाश आनंद के समर्थकों ने इस फैसले पर नाराजगी जताई है, जबकि पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने मायावती के फैसले का समर्थन किया है। उनका कहना है कि पार्टी की एकता और अनुशासन बनाए रखने के लिए यह फैसला जरूरी था बसपा में यह बदलाव आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर पार्टी की रणनीति को लेकर भी सवाल खड़े करता है। मायावती ने हाल ही में पार्टी संगठन को मजबूत करने और युवाओं को जोड़ने पर जोर दिया है, लेकिन यह फैसला पार्टी के भीतर अस्थिरता का संकेत देता है।

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