RBI Digital Fraud Guidelines: RBI के नए नियम, ग्राहक को 3 दिन में करना होगा ये काम, इस कंडीशन में एक महीने में मुआवजा देगी बैंक

आरबीआई ने डिजिटल फ्रॉड से ग्राहकों की सुरक्षा के लिए नया ड्राफ्ट नियम जारी किया है। प्रस्ताव के तहत 50 हजार रुपये तक के ऑनलाइन बैंकिंग फ्रॉड में ग्राहक को 85% या अधिकतम 25 हजार रुपये तक मुआवजा मिल सकता है।

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RBI Digital Fraud Guidelines: देश में बढ़ते ऑनलाइन बैंकिंग फ्रॉड को देखते हुए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने ग्राहकों की सुरक्षा के लिए नया ड्राफ्ट गाइडलाइन जारी किया है। प्रस्ताव के अनुसार 50 हजार रुपए तक के डिजिटल फ्रॉड मामलों में ग्राहकों को आंशिक मुआवजा देने की व्यवस्था का जा सकती है।  RBI Draft Rules 2026

50 हजार तक का फ्रॉड छोटा 

RBI के प्रस्ताव के मुताबिक 50 हजार रुपए तक के डिजिटल फ्रॉड को छोटे मूल्य का मामला माना जाएगा। ऐसे मामलों में ग्राहक को हुए नुकसान का 85 प्रतिशत या अधिकतम 25 हजार रुपए तक का मुआवजा दिया जा सकता है, जो भी राशि कम होगी। ये सुविधा किसी भी ग्राहक को जीवन में केवल एक बार मिलेगी। 

केंद्रीय बैंक के अनुसार देश में होने वाले 65 प्रतिशत बैंकिंग फ्रॉड ऐसे ही होते हैं जिनकी रकम 50 हजार रुपए से कम होती है। इसी कारण इन छोटे लेकिन आम साइबर फ्रॉड मामलों में ग्राहक को राहत देने के लिए ये ढ़ांचा तैयार किया गया है।  Online Banking Fraud Compensation

फ्रॉड की सूचना देने के लिए तय समय सीमा

अगर किसी ग्राहक के साथ ऑनलाइन फ्रॉड होता है तो उसे 5 दिन के अंदर अपने बैंक और नेशनल साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज करानी होगी। शिकायत मिलने के बाद बैंक को 30 दिन के अंदर पूरे मामले की जांच कर ग्राहक को जवाब देना होगा। इस दौरान ये तय किया जाएगा कि गलती किसकी है - बैंक, ग्राहक या कोई और।  

गलती साबित करने की जिम्मेदारी बैंक पर

RBI के प्रस्ताव के अनुसार अगर बैंक या किसी थर्ड पार्टी की सुरक्षा में कमी के कारण फ्रॉड होता है तो ग्राहक की जिम्मेदारी शून्य होगी। ऐसे मामलों में पूरा पैसा वापस किया जाएगा और ट्रांजैक्शन को रिवर्स किया जा सकता है।  साथ ही ये भी स्पष्ट किया गया है कि फ्रॉड में ग्राहक की गलती साबित करने की जिम्मेदारी बैंक की होगी। यानी बैंक को ये साबित करना होगा कि ग्राहक की लापरवाही के कारण धोखाधड़ी हुई है। 

मुआवजा तय करने का प्रस्तावित फॉर्मूला

RBI ने मुआवजा देने के लिए एक खास फॉर्मूला भी प्रस्तावित किया है। अगर किसी ग्राहक का नुकसान 29,412 रुपये से कम है तो उसे कुल नुकसान का 85 प्रतिशत मुआवजा मिलेगा। इसमें 65% राशि RBI, जबकि ग्राहक का बैंक और जिस बैंक के खाते में पैसा गया है वे 10-10 प्रतिशत योगदान देंगे। यदि नुकसान 29,412 रुपये से 50 हजार रुपये के बीच है तो आरबीआई 19,118 रुपये देगा। वहीं ग्राहक का बैंक और लाभार्थी बैंक 2,941-2,941 रुपये का योगदान करेंगे।

फ्रॉड की परिभाषा में किया गया बदलाव

नए प्रस्ताव में डिजिटल फ्रॉड की परिभाषा में भी बदलाव - अगर कोई ठग किसी व्यक्ति को बहलाकर, झांसा देकर या दबाव डालकर पैसे ट्रांसफर करवाता है तो उसे भी आधिकारिक रुप से फ्रॉड माना जाएगा।  इस बदलाव का उद्देश्य उन मामलों को भी कवर करना है जहां ग्राहक को धोखे या मानसिक दबाव में डालकर ऑनलाइन ट्रांजैक्शन कराया जाता है।

बैंकों को ग्राहकों के लिए सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के निर्देश

बैंको को कई सुरक्षा कदम उठाने होंगे - 500 रुपए से ज्यादा के हर ट्रांजैक्शन पर बैंक को ग्राहक को SMS अलर्ट भेजना होगा और इसके लिए कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाएगा। बैंकों को 24x7 टोल फ्री हेल्पलाइन, एसएमएस, ईमेल और एक विशेष लिंक उपलब्ध कराना होगा ताकि ग्राहक जरूरत पड़ने पर तुरंत अपना कार्ड या बैंक अकाउंट ब्लॉक (Account Block) कर सके। 

कब लागू हो सकते हैं नए नियम

आरबीआई के प्रस्ताव के अनुसार यह नए नियम 1 जुलाई 2026 से लागू किए जा सकते हैं और ये इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग ट्रांजैक्शन (Electronic Banking Transaction) पर लागू होंगे। केंद्रीय बैंक ने इस मसौदे पर 6 अप्रैल 2026 तक बैंकों, विशेषज्ञों और अन्य हितधारकों से सुझाव और टिप्पणियां मांगी हैं। इसके बाद अंतिम नियम तय किए जाएंगे।

ग्राहक और बैंक की लापरवाही की भी की गई परिभाषा

ड्राफ्ट में यह भी स्पष्ट किया गया है कि किन स्थितियों को बैंक या ग्राहक की लापरवाही माना जाएगा। यदि बैंक जरूरी सुरक्षा प्रणाली लागू नहीं करता, ट्रांजैक्शन अलर्ट नहीं भेजता, फ्रॉड रिपोर्ट करने की आसान व्यवस्था नहीं देता या शिकायत पर समय पर कार्रवाई नहीं करता तो इसे बैंक की लापरवाही माना जाएगा।

वहीं यदि ग्राहक अपना पिन (PIN), पासवर्ड (Password) या ओटीपी (OTP) किसी अन्य व्यक्ति के साथ साझा करता है या फ्रॉड की सूचना देने में देरी करता है तो इसे ग्राहक की लापरवाही माना जाएगा।

आरबीआई ने यह भी संकेत दिया है कि यह मुआवजा व्यवस्था लागू होने के बाद एक वर्ष तक प्रभावी रहेगी। इसके बाद इसकी समीक्षा की जाएगी और भविष्य में बैंकों की हिस्सेदारी बढ़ाने तथा आरबीआई के योगदान को धीरे-धीरे कम करने की योजना पर विचार किया जा सकता है।

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