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E-WASTE CONTROL: हम कही भी जाए,घूमने, ट्यूशन क्लासेज, ऑफिस या फिर मॉल हमारी आदत होती है हर जगह मोबाइल कैरी करने की। आजकल की दुनिया सिर्फ मोबाइल फोन ही चला रही है। ऐसे में अगर आपका फोन कही डेड हो जाए तो आपका क्या रिएक्शन होगा। अगर आप एंड्रॉयड यूजर्स है तो आपको अपने परेशानी का समाधान मिल भी जाए पर अगर आप आईफोन यूजर है तो आप क्या करेंगे?
इसी परेशानी का हल सरकार लेकर आने वाली हैं। अब सरकार एक ऐसी स्कीम लायेगी जिसके तहत हमे एंड्रॉयड और आईफोन केलिए अलग अलग चार्जर की जरूरत नहीं पड़ने वाली। हाल ही में यूरोपियन यूनियन ने ये कदम उठाया हैं। उन्होंने सारे इलेक्ट्रॉनिक्स अप्लायंसेज केलिए सिर्फ टाइप सी चार्जिंग पोर्ट की मंजूरी दी हैं।
उन्होंने कहा कि वक्त आ गया है कि हम 'सिर्फ दो तरह के चार्जिंग पॉइंट्स' के फ्रेमवर्क पर काम करना शुरू करें। यानी एक चार्जिंग पोर्ट स्मार्टफोन, लैपटॉप, टैबलेट, ईयरबड्स, स्पीकर जैसे छोटे और मीडियम साइज वाले डिवाइसेस के लिए इस्तेमाल होगा। वहीं दूसरा फीचर फोन्स में यूज होगा।
अगर सरकार इस पॉलिसी को लागू करती है तो इससे सबसे बड़ा घाटा एपल कंपनी को होने वाला हैं। ऐपल अपने स्मार्टफोन्स में लाइटनिंग केबल का इस्तेमाल करता है। और सिर्फ इनका केबल ही हजारो मे बिकता हैं।इतना ही नहीं एपल iPhone के साथ बॉक्स में चार्जर भी नहीं देती है। ऐसे में टाइप-सी या किसी दूसरे चार्जिंग पोर्ट के कॉमन होने से कंपनी का बिजनेस प्रभावित होगा।
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