Black Fungus: ब्लैक फंगस के केस में स्टेरॉयड का ज्यादा इस्तेमाल ले सकता है आपकी जान,जानिए क्यों दी AIIMS डायरेक्टर ने चेतावनी

Black fungus

नई दिल्ली। (भाषा) एम्स के डॉक्टरों ने शनिवार को कहा कि घर पर इलाज करा रहे कोविड-19 के मरीजों को रेमडेसिविर की दवा नहीं लेनी चाहिए और ऑक्सीजन का स्तर 94 से नीचे जाने पर अस्पताल में भर्ती होना चाहिए। कोविड-19 मरीजों के लिए गृह पृथक-वास में उपचार और देखाभाल विषय पर डॉक्टर एक वेबिनार को संबोधित कर रहे थे।

महामारी से पहले कम आते थे ब्लैक फंगस के केस
हेल्थ ब्रीफिंग देते समय डॉ. गुलेरिया ने कहा कि ब्लैक फंगस कुछ मात्रा में मिट्टी, हवा और खाने की चीजों पर भी हो सकता है, लेकिन इसमें बैक्टीरिया इतनी तादाद में नहीं होते कि किसी को नुकसान पहुंचा सकें। कोरोना महामारी से पहले इसके मामले बहुत ही कम सामने आते थे, लेकिन वर्तमान में कोरोना संक्रमित मरीजों में इसकी संख्या बढ़ी है।

23 में से 20 मरीज कोरोना पॉजिटिव
वर्तमान में दिल्ली AIIMS में ब्लैक फंगस से पीड़ित 23 मरीजों का इलाज चल रहा है। इसमें से 20 कोरोना पॉजिटिव हैं। डॉ. गुलेरिया ने बताया कि अब तक अलग-अलग राज्यों में इस बीमारी के 500 से ज्यादा केस सामने आ चुके हैं। उन्होंने बताया कि ब्लैक फंगस से चेहरे, नाक, आंख की परत और दिमाग पर असर पड़ सकता है। यह फेफड़ों में भी फैल सकता है।

डायबिटीज के मरीजों को ज्यादा नुकसान
AIIMS डायरेक्टर ने कहा कि कोरोना पीड़ित कई मरीजों को डायबिटीज (शुगर) भी होती है। ऐसे मरीजों को स्टेरॉयड देने पर उन्हें फंगल इंफेक्शन होने का खतरा बढ़ जाता है। इसे रोकने के लिए मरीज को स्टेरॉयड बहुत सोच समझकर दिए जाने की जरूरत है। इससे पहले हरियाणा सरकार ब्लैक फंगस को गंभीर रोग मान चुकी है। साथ ही ओडिशा सरकार ने बीमारी को मॉनिटर करने के लिए 7 सदस्यों की टीम बनाई है। मध्यप्रदेश के इंदौर में इस बीमारी से 12 मई को 2 लोगों की मौत हो गई थी।

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