Varanasi Flood: वाराणसी में भोलेनाथ को जलाभिषेक करने को आतुर गंगा, मणिकर्णिका-हरिश्चंद्र घाट डूबे, आरती का बदला स्थान

Varanasi Flood: शिव के मस्तक पर विराजमान मां गंगा अब भगवान भोले नाथ की धाम में जलाभिषेक करने करने को आतुर है। शिव की अतिप्रियशय राजधानी काशी में स्थित काशी विश्वनाथ धाम की ओर गंगा अब बढ़ने लगी है

Varanasi Flood: वाराणसी में भोलेनाथ को जलाभिषेक करने को आतुर गंगा, मणिकर्णिका-हरिश्चंद्र घाट डूबे, आरती का बदला स्थान

रिपोर्ट-अभिषेक सिंह, वाराणसी 

हाइलाइट्स 

  • अर्धचंन्द्राकार घाटों आपसी सम्पर्क टुटा,नौकायान पर रोक
  • गंगा के बढ़ते जलस्तर से बड़ी दुश्वारियां 
  • मणिकर्णिका-हरिश्चंद्र घाट डूबे, आरती का बदला स्थान

Varanasi Flood: शिव के मस्तक पर विराजमान मां गंगा अब भगवान भोले नाथ की धाम में जलाभिषेक करने करने को आतुर है। शिव की अतिप्रियशय राजधानी काशी में स्थित काशी विश्वनाथ धाम की ओर गंगा अब बढ़ने लगी है, लेकिन इससे पहले काशी की घाटों से लगायत हजारों छोटे मंदिर गंगा में जल समाधि ले चुके हैं। मोक्ष नगरी के रूप में जाने वाली काशी में मोक्ष पाने के लिए थोड़ा इंतजार करना पड़ रहा है क्योंकि शवदाह काशी की गलियों या छतो पर हो रही है। यही नहीं काशी के अर्धचंद्राकार श्रृंखला के 84 घाटो का आपसी संपर्क टूट गया है। सबसे खूबसूरत और पर्यटको के लिए आकर्षण का केंद्र नमो घाट जहां पर सूर्य नमस्कार करते हुए 50 फिट ऊँची स्कल्पचर दभी डूबने की कगार पर है।

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 काशी में गंगा और सहायक नदियों की स्थिति 

पहाड़ी इलाकों में हो रही जोरदार बारिश और विभिन्न राज्यों के बांधों से छोड़े जा रहे लाखों क्यूसेक पानी का असर मैदानी इलाके की प्रमुख नदी गंगा में दिखाई दे रही है। गंगा में जलस्तर में वृद्धि के चलते वाराणसी समेत गंगा के किनारे स्थित पूर्वांचल के अधिकांश जिले प्रभावित होते जा रहे हैं। गंगा के जलस्तर में पिछले एक पखवाड़े से लगातार बढ़ाव दर्ज किया जा रहा है। जिसका सिलसिला आज भी एक सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से जारी है।  गंगा की सहायक नदियां वरुणा और अस्सी में भी पलट प्रवाह के चलते निचले इलाकों में पानी घुसने लगा है।  जिसके चलते, कोनिया,पुराना पुल सरैया,नक्की घाट जैसे इलाकों में पानी भरना शुरू हो गया।

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अर्धचंन्द्राकार घाटों आपसी सम्पर्क टुटा,नौकायान पर रोक

काशी की पहचान धर्म और आध्यात्म की राजधानी के साथ काशी की मढ़ियाँ-सीढ़ियाँ और पक्के घाटों से होती है। गंगा का बढ़ता जलस्तर एक-एक कर के मढ़िया- सीढ़िया के साथ घाटो को डुबाते जा रही है। गंगा के जलस्तर का बहाव काफ़ी तेज है और जलस्तर धीरे-धीरे चेतावानी बिंदु के करीब पहुँच रही है जिसको देखते हुए काशी में नावो के संचालन पर रोक लगा दी गयी है हालांकि बड़े क्रूज अभी तक संचालित किया जा रहा है। 

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 गंगा आरती का स्थल बदला 

 गंगा के बढ़ते जल स्तर के कारण काशी वासियों समेत देश के अलग-अलग हिस्सों से आने वाले सैलानियों की आस्था जलस्तर और बारिश पर भारी पड़ती हुई दिखाई दे रही है। गंगा के जलस्तर के चलते गंगा आरती का स्थल बार बार बदला गया। काशी के दशाश्वमेघ घाट,अस्सी घाट समेत अलग-अलग हिस्सों पर होने वाली दैनिक सांन्ध्याकालीन गंगा आरती गंगा के बढ़ते जलस्तर से दूसरी जगह शिफ्ट हो गई है। आरती अब कहीं पर छत पर हो रही है तो कहीं पर सांकेतिक रूप से किया जा रहा है।

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 गंगा के बढ़ते जलस्तर से बड़ी दुश्वारियां 

गंगा काशी में चेतावनी बिंदु से चंद सेंटीमीटर नीचे बह रही है और जलस्तर में लगातार बढ़ोतरी हो रही है ऐसे में अंदाजा लगाया जा रहा है कि आगामी 24 घंटे में गंगा का जलस्तर चेतावनी बिंदु को पार कर खतरे की निशान की ओर बढ़ने लगेंगी।  फिलहाल मौजूदा जलस्तर से ही काशी की दुश्वारियां बढ़ाना शुरू हो गई है। नदी के किनारे स्थित रिहायसी इलाकों में गंगा और उसकी सहायक नदी वरुणा और अस्सी का जलस्तर बस्तीयों में घुसने लगा है।  गंगा के किनारे स्थित तमाम लोगों के ऊपर रोजी-रोटी रोटी का संकट भी मंडराने लगा है यही नहीं बाढ़ की संभावित स्थिति को देखते हुए किसान भी डरे समय नजर आ रहे हैं।

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