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UP Transport Fake Permit Case: भारत-नेपाल सीमा पर फर्जी परमिट से बस संचालन का खुलासा, तीन जिलों में FIR दर्ज

UP Transport Fake Permit Case: उत्तर प्रदेश में इंडो-नेपाल बस मार्ग पर जाली परमिट के जरिए चल रही अवैध बसों का भंडाफोड़ हुआ है। परिवहन विभाग ने FIR दर्ज कर STF जांच की सिफारिश की है।

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UP Bureau
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हाइलाइट्स

  • नेपाल सीमा पर फर्जी परमिट से बस संचालन का खुलासा
  • अलीगढ़, बागपत, महाराजगंज में FIR दर्ज
  • VAHAN पोर्टल की खामी से हुआ फर्जीवाड़ा संभव 
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रिपोर्ट- आलोक राय 

UP Transport Fake Permit Case:उत्तर प्रदेश परिवहन विभाग (UP Transport Department) ने भारत-नेपाल अंतरराष्ट्रीय बस मार्ग पर जाली परमिट (Fake Bus Permits) के जरिए अवैध रूप से संचालित हो रही प्राइवेट बसों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है।

यह खुलासा विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालय (FRRO) लखनऊ और सशस्त्र सीमा बल (SSB) की रिपोर्ट के आधार पर हुआ, जिसके बाद परिवहन आयुक्त बृजेश नारायण सिंह (Transport Commissioner Brajesh Narayan Singh) ने प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई के कड़े निर्देश दिए हैं।

अलीगढ़, बागपत, महाराजगंज में FIR दर्ज

जांच में सामने आया कि कई बसें फर्जी परमिट के आधार पर नेपाल सीमा (Nepal Border) से संचालित की जा रही थीं। ये परमिट क्षेत्रीय परिवहन अधिकारियों के नाम से जारी प्रतीत हो रहे थे, लेकिन इनकी कोई कानूनी वैधता नहीं थी। अलीगढ़, बागपत और महाराजगंज जिलों में स्थानीय ARTO द्वारा स्पष्ट किया गया कि इस तरह के किसी परमिट को अधिकृत रूप से जारी नहीं किया गया था। इन तीनों जिलों में एआरएम की ओर से FIR दर्ज करने की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। 

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गोरखपुर, इटावा और औरैया में भी जांच

गोरखपुर, इटावा और औरैया जिलों में भी संदिग्ध अंतरराष्ट्रीय बस परमिट की जानकारी सामने आई है, जो कि भारत-नेपाल यात्री परिवहन समझौता 2014 (Indo-Nepal Passenger Transport Agreement 2014) का सीधा उल्लंघन है। गोरखपुर में इस मामले में अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की जा चुकी है।

STF से जांच की मांग, केंद्र सरकार को पत्र

परिवहन आयुक्त बीएन सिंह ने यूपी डीजीपी को पत्र लिखकर मामले की विशेष कार्यबल (STF) से जांच कराने की सिफारिश की है। साथ ही, उन्होंने सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) और विदेश मंत्रालय (MEA) से अनुरोध किया है कि यह स्पष्ट किया जाए कि केवल Form-C में जारी परमिट, जो नेपाल के दूतावास या वाणिज्य दूतावास द्वारा निर्गत हो, ही वैध माने जाएंगे।

VAHAN पोर्टल की खामी बनी बड़ी वजह

इस पूरे फर्जीवाड़े की एक बड़ी वजह VAHAN 4.0 पोर्टल में मौजूद तकनीकी खामी बताई जा रही है, जिसमें ‘via’ कॉलम में मैन्युअल एंट्री कर अवैध तरीके से नेपाल जैसे अंतरराष्ट्रीय गंतव्यों को शामिल किया जा रहा था। परिवहन विभाग ने इस खामी को दुरुस्त करने के लिए NIC को निर्देशित किया है और फेसलेस परमिट सिस्टम के पुन: डिज़ाइन की मांग की है।

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सुरक्षा से समझौता नहीं

परिवहन आयुक्त बीएन सिंह ने स्पष्ट कहा,“राष्ट्रीय सुरक्षा से खिलवाड़ करने वाले जाली दस्तावेज किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे। दोषियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।”  

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